परमाणु रिएक्टर की मरम्मत की कोशिश

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Image caption दूसरे नम्बर के रिएक्टर में प्रदूषित पानी के रिसाव को बंद करने के लिए पॉलीमर का इस्तेमाल किया जा रहा है

जापान के क्षतिग्रस्त फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में काम करने वाले इंजीनियर एक दरार से निकल रहे रेडियोधर्मी पानी को रोकने की कोशिश में जुटे हुए हैं.

ये दरार दूसरे नम्बर के रिएक्टर के, कंकरीट से बने गढ्ढे की दीवार में पाई गई है.

पहले तो ये प्रदूषित पानी कहां से आ रहा है इसका पता लगाने में ही बड़ी कठिनाई हुई.

लेकिन दरार का पता लग जाने के बाद उसे बंद करना और भी मुश्किल साबित हो रहा है.

इंजीनियरों ने इस क्षतिग्रस्त गढ्ढे में कंकरीट उड़ेलने की कोशिश की लेकिन वहां इतना अधिक पानी था कि कंकरीट जम नहीं पाई.

अब वो एक सोखने वाला पॉलीमर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन वो भी काम करता दिखाई नहीं दे रहा.

कोशिश जारी है लेकिन अभी ये कहना मुश्किल है कि इस दरार को बंद करने में कब सफलता मिलेगी.

अधिकारियों का कहना है कि ये रेडियोधर्मी पदार्थ जल्दी ही समुद्र में समा जाएगा इसलिए इससे स्वास्थ्य को कोई ख़तरा नहीं है.

लेकिन उन्होने ये चेतावनी भी दी है कि परमाणु संयंत्र के आस पास के इलाक़े से जिन लोगों को हटाया गया है वो लम्बे समय तक लौट नहीं सकेंगे.

कर्मचारियों के शव मिले

इस बीच उन दो कर्मचारियों के शव, संयंत्र के अंदर ही मिल गए हैं जो भूकम्प और उसके बाद आई सुनामी के कारण मारे गए थे.

बताया गया है कि 24 वर्षीय काज़ूहीको कोकोबू और 21 वर्षीय योशीकी तेराशीमा के सिर को कई चोटें लगी थीं और ख़ून बहने के कारण इनकी मौत हुई.

वैसे तो इनके शव पिछले बुधवार को मिल गए थे लेकिन क्योंकि वो इतने समय रेडियोधर्मी प्रदूषण में पड़े रहे इसलिए परिवारों को लौटाने से पहले उनका शोधन आवश्यक था.

जापान के उत्तरी तटीय इलाक़े के साथ साथ जो खोजी और बचाव अभियान चल रहा था अब उसे कम किया जा रहा है.

इस अभियान में जापान और अमरीकी सेना के बचाव दल, नौकाओं और ग़ोताख़ोरों की मदद से लोगों की तलाश कर रहे हैं.

पिछले तीन दिनों में उन्हे 70 से अधिक शव मिले हैं लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब भी कम से कम पंद्रह हज़ार लोग लापता हैं. और शायद इस प्राकृतिक त्रासदी में मारे गए कितने ही लोगों के शव कभी न मिलें.

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