इतिहास के पन्नों से

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Image caption मार्टिन लूथर किंग ने अमरीका में नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया था.

चार अप्रैल का दिन इतिहास में कई वजहों से दर्ज है पूरी दुनिया के लिए और दक्षिण एशिया के लिए भी.

चार अप्रैल 1968- मार्टिन लूथर किंग की हत्या

आज के ही दिन अमरीका के जाने माने नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग की हत्या कर दी गई थी.

अमरीका के मेम्फिस शहर में मार्टिन लूथर किंग पर उस समय गोली चलाई गई जब वो सफाई कर्मचारियों के साथ कम वेतन और ख़राब कार्य परिस्थितियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.

होटल की बालकनी में खड़े मार्टिन लूथर किंग को गर्दन में गोली लगी और अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

उनकी मौत के बाद अमरीका के कई शहरों में दंगे हुए लेकिन पुलिस की बड़ी तैनाती से स्थिति नियंत्रण में रही. किंग की हत्या के आरोप में जेम्स अर्ल रे को 99 साल की सज़ा सुनाई गई.

रे ने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की लेकिन अपील ख़ारिज़ कर दी गई. 1998 में जेल में ही रे की मौत हो गई.

चार अप्रैल 1979: जुल्फ़िक़ार अली भुटटो को फांसी

Image caption भुट्टो को 4 अप्रैल के दिन ही फांसी दे दी गई थी

चार अप्रैल का दिन पाकिस्तान के लिए ख़ासा महत्वपूर्ण है.

चार अप्रैल 1979 के दिन पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गई थी.

51 वर्षीय भुट्टो 1973 से देश के प्रधानमंत्री थे जिन्हें सैन्य तख्तापलट के ज़रिए पद से हटाया गया.

भुट्टो पर अपने एक विरोधी राजनेता की हत्या का आरोप लगा कर मामला चलाया गया और मौत की सज़ा सुनाई गई.

दुनिया भर में इस सुनवाई को पक्षपातपूर्ण करार दिया गया लेकिन जनरल ज़िया उल हक के नेतृत्व वाले सैन्य शासन ने किसी की एक न सुनी और भुट्टो को फांसी दे दी.

भुट्टो की फांसी के बारे में किसी को पहले से इत्तिला नहीं दी गई थी. जिस दिन भुट्टो को फांसी हुई उस दिन उनकी पत्नी और बेटी बेनीज़र उनसे मिले थे. इस मुलाक़ात के दौरान प्रशासन ने परिवारजनों से कह दिया था कि ये भुट्टो के साथ उनकी आख़िरी मुलाक़ात है.

भुट्टो को फांसी दिए जाने की घोषणा स्थानीय समय के अनुसार दिन के ग्यारह बजे की गई जिसके बाद उनके शव को उनके पैतृक गांव सिंध भेज दिया गया था.