जापान: संक्रमित पानी बना मुसीबत

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption रिएक्टर की दीवार में पड़ी आठ इंच की दरार के चलते रिसाव हो रहा है.

जापान के फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से हो रहे रेडियोधर्मी पानी के रिसाव और पानी बहने के रास्ते का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ अब रंगीन डाई का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस रिसाव के बारे में अब तक मिली जानकारी के अनुसार यह रिसाव दूसरे रिएक्टर की दीवार में पड़ी आठ इंच की दरार के चलते हो रहा है.

इस बीच संयंत्र को चलाने वाली ‘टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी’(टेप्को) का कहना है कि भारी मात्रा में रेडियोधर्मी किरणों से संक्रमित पानी को ठिकाने लगाने के लिए उसके पास पर्याप्त जगह नहीं.

यही वजह है कि मंगलवार से यह कंपनी हल्के रुप से संक्रमित लगभग 11,000 हज़ार टन पानी को समुद्र में छोड़ना शुरु कर देगी.

हालांकि सरकार का कहना है कि इससे वहां रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ेगा.

त्रासदी का असर

इसे पहले रिसाव को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने 'पोलीमर' पदार्थों की मदद से दरार को भरने की कोशिश की थी लेकिन वो नाकाम रहे थे.

जापान में सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक दूसरे रिएक्टर की दीवार से हो रहे इस रिसाव को जल्द से जल्द रोकना ज़रूरी है.

सरकार के एक प्रवक्ता यूकियो एदानो ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि लंबे समय तक यह रिसाव जारी रहने पर ‘समुद्री जीवन और जल संसाधन पर इसका व्यापक असर हो सकता है.’

इस बीच कार्यकर्ता संयंत्र को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी का छिड़काव कर रहे हैं. हालांकि टोक्यो में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इससे संयंत्र में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है.

जापान में आए भारी भूकंप के बाद ‘टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी’ पिछले तीन हफ्ते से संयंत्र में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटी है.

इस बीच भूकंप और सूनामी के बाद जापान में मरने वालों की संख्या 12,157 तक पहुंच गई है. जापान में अब भी 15,500 से ज़्यादा लोग लापता हैं. ृ

संबंधित समाचार