इतिहास के पन्नों से

Image caption जिम्मी कार्टर ने न्यूट्रान बम का उत्पादन रोकने की घोषणा की थी.

सात अप्रैल का दिन इतिहास में कई घटनाएं समेंटे है.

सात अप्रैल 1978 न्यूट्रॉन बम उत्पादन रुका

अमरीका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने विवादास्पद न्यूट्रॉन बम के विकांस और उत्पादन का काम पर रोक लगा दी.

न्यूट्रॉन बम एक ऐसा बम है जो परंपरागत परमाणु बम की तरह नही व्यापक स्तर पर संपत्ति का विनाश नही करता लेकिन इससे पैदा होने वाला रेडियोधर्मी विकिरण परमाणु बम से फैलने वाले विकिरण से कई गुना ज्यादा होता है.

न्यूट्रॉन बम का विकांस जान माल की हानि कम करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारने के लिए किया गया था.

राष्ट्रपति जिमी कार्टर का प्रशासन इन बमों को मिसाइलों और तोपों के गोला-बारुद में इस्तेमाल कर यूरोप में तैनात करना चाहता था.

अमरीकी सेनाध्यक्ष का मानना था कि ये बम यूरोप में सोवियत सेना के खिलाफ युद्ध में कारगार साबित होगा. विरोधियों का कहना था कि इससे परमाणु युद्ध का ख़तरे और बढ़ जाएगें.

नार्वे ,बेल्ज़ियम ,हालैंड़ समेत तमाम यूरोपीय देशों न्यूट्रॉन बम को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे.

1958 में न्यूट्रॉन बम का जनक अमरीकी वैज्ञानिक सैम कोहन को माना जाता है.

सात अप्रैल 1999 अमरीका ने पाई 'बनाना वार' में जीत

व्यापार संगठन ने यूरोपीय संघ और अमरीका के बीच केले के व्यापार को लेकर लंबे समय से जारी विवाद को खत्म करते हुए अमरीका के पक्ष में फैसला सुनाया.

अंतर्राष्द्रीय व्यापार संगठन ने कहा कि यूरोपीय संघ ने व्यापार के अंतर्राष्द्रीय नियमों का उल्लंघन किया है.

ये सारा विवाद इसलिए खड़ा हुआ था क्योंकि यूरोपीय संघ कथित रुप से अफ्रीका और कैरेबियाई द्दीप समूहों के उत्पादित केले के व्यापार को अधिक बढ़ावा दे रहा था जिसकी वजह से लैटिन अमरीका और अमरीका के केले के व्यावसायियों को आर्थक नुकसान हो रहा था.

सट्टेबाज़ी का रैकेट

इसी दिन 2000 में भारत में दिल्ली पुलिस ने करोड़ों रुपए के क्रिकेट मैच फिक्सिंग और सट्टेबाज़ी के रैकेट का पर्दाफाश किया था.

इसमें दक्षिण अफ्रीका के पांच खिलाड़ी शामिल थे.

इन खिलाड़ियों में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए भी शामिल थे.

मैच फिक्सिंग और सट्टेबाज़ी के आरोप में दिल्ली के एक ऑपरेटर राजेश कालरा को ग़िरफ़्तार किया गया था.