मिस्र में सेना ने शिकंजा कसा

तहरीर चौक इमेज कॉपीरइट AFP

मिस्र की अंतरिम सैन्य सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक की ओर से नियुक्त किए गए कुछ प्रांतों के राज्यपालों को हटाने की घोषणा की है.

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब सेना और सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

इससे पहले मिस्र में प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने के लिए सेना ने कार्रवाई की थी जिसमें एक व्यक्ति के मारे जाने और 71 लोगों के घायल होने की खबर है.

माना जा रहा है सेना की यह घोषणा प्रदर्शनकारियों को यह दिलासा दिलाने के लिए है कि बदलाव की गति तेज़ है.

शनिवार देर शाम हुई सैन्य कार्रवाई में घायलों के शरीर पर गोलियों से ज़ख़्म के निशान पाए गए, लेकिन सेना ने कहा है कि फ़ायरिंग नहीं की गई.

शुक्रवार की रात तहरीर चौक पर जमा प्रदर्शनकारी पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक पर भ्रष्टाचार मामलों में मुकदमा चलाए जाने की मांग कर रहे थे.

इसके साथ ही मुबारक की जगह लेने वाले अंतरिम नेता फील्ड मार्शल मोह्म्मद हुसैन तंतावी के इस्तीफ़े की मांग भी की गई.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें लाठियों से पीटा गया और उन पर गोलियां चलाईं गई.

लेकिन सेना के प्रवक्ता ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया है कि प्रदर्शनकारियों पर नहीं बल्कि हवा में फ़यरिंग की गई थी.

हिंसा के निशान

इसी साल होस्नी मुबारक को सत्ता से हटने पर मजबूर करने वाले प्रदर्शनों का केंद्र तहरीर चौक, प्रदर्शनकारियों के लिए प्रतीकात्मक अहमियत रखता है.

शुक्रवार की रात हुई हिंसा के निशान तहरीर चौक पर बिखरे कांच और तोड़-फोड़ के मलबे में दिखाई दिए.

सेना के दो वाहनों सहित तीन वाहन जला दिए गए.

सेना ने एक वक्तव्य में हिंसा और कर्फ़्यू तोड़ने के लिए असामाजिक तत्वों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

वक्तव्य में कहा गया है, "सशस्त्र सेना ज़ोर देकर फिर ये कहती है कि वह दंगा भड़काने की कार्रवाई या देश हित को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी."

हालांकि सेना का कहना है कि कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि उनके सहयोगियों को घसीट कर वैन में डाल कर ले जाया गया है.

तहरीर चौक पर जन विरोध की जो आंधी चली थी उसने इसी साल 11 फरवरी को होस्नी मुबारक को सत्ता से हटा दिया था.

उस समय सेना ने मुबारक का साथ छोड़ कर तटस्थ रुख़ अपनाया था.

लेकिन अब कई लोग ये मान रहे हैं कि राजनीतिक हस्तांतरण की निगरानी कर रही सेना मुबारक का साथ दे रही है.

संबंधित समाचार