लीबिया में सुलह-सफ़ाई की कोशिश

अफ्रीकी संघ के नेताओं के साथ कर्नल मुअम्मार क़द्दाफ़ी इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption सप्ताह भर में क़द्दाफ़ी पहली बार रविवार को मीडिया के सामने आए

अफ्रीकी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल लीबिया में लड़ाई रुकवाने का प्रस्ताव लेकर विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़े बेनग़ाज़ी का दौरा कर रहा है. इससे पहले ये दल राजधानी त्रिपोली का दौरा कर चुका है और कहा गया है कि कर्नल मुअम्मार क़द्दाफ़ी ने इन प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.

इस शांति प्रस्ताव में तुरंत युद्धविराम लागू किए जाने और राजनीतिक बातचीत शुरू करने की पेशकश की गई है.

लेकिन बेनग़ाज़ी में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लायन का कहना है कि अफ्रीकी संघ का प्रतिनिधिमंडल जब बेनग़ाज़ी पहुँचा तो उनके स्वागत में कोई ख़ास गर्मजोशी नज़र नहीं आई.

संवाददाता के अनुसार किसी भी समझौते के विरोधियों ने अफ्रीकी संघ के दल को हवाई अड्डे से ले जाने के लिए कारों का काफ़िला बनाया और लीबियाई नेता कर्नल मुअम्मार क़द्दाफ़ी के ख़िलाफ़ नारे लगाए जिनका अर्थ था कि ग़द्दाफ़ी सत्ता से हटें.

इससे साफ़ नज़र आता है कि विपक्ष इन शांति प्रस्तावों को मानने के लिए फिलहाल तो तैयार नहीं है. ये ख़बर लिखे जाने तक तो विपक्षी सत्तारूढ़ परिषद की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी.

शांति रोडमैप

इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के नेता जैकब ज़ूमा ने कहा था कि कर्नल क़द्दाफ़ी की सरकार ने ये प्रस्ताव स्वीकर कर लिया है लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि चूँकि ख़ुद जैकब ज़ूमा बेनग़ाज़ी नहीं पहुँचे, इससे इस मिशन की साख़ और गुंजाइश ही संदेह और सवालों के दायरे में घिर गई है.

अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष जियाँ पिंग के एक प्रवक्ता नूरुद्दीन मज़नी ने संवाददाताओं को बताया कि कर्नल क़द्दाफ़ी के पक्ष ने अफ्रीकी संघ के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है, "लीबियाई अधिकारियों ने हमारे दल को पुष्टि की है कि उन्हें ये प्रस्ताव स्वीकार्य हैं जिसमें संकट का शांतिपूर्ण हल निकालने का एक रौडमैप शामिल है. इसमें लड़ाई रुकवाना पहली प्राथमिकता जो इस रोडमैप का पहला बिंदू भी है."

"लीबियाई नेता ने इन प्रस्तावों को निजी समर्थन भी जताया है जिनमें असरदार निगरानी उपाय भी सुझाए गए हैं. हम नैटो से अपील करते हैं कि वो बमबारी तुरंत रोक दे क्योंकि हमें बातचीत की प्रक्रिया को एक मौक़ा अवश्य देना चाहिए. इस संकट का कोई सैनिक समाधान नहीं है और हमारा रोडमैप इस बिंदु पर बिल्कुल स्पष्ट है."

लेकिन विपक्षी नेताओं ने ये स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली माँग है कि कर्नल क़द्दाफ़ी सत्ता से हटें और जब तक कर्नल क़द्दाफ़ी की सेनाएँ मिसराता जैसे शहरों में मौजूद हैं, वो कोई युद्धविराम स्वीकार नहीं करेंगे.

विपक्षी नेताओं ने कहा है कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है जिसमें कर्नल क़द्दाफ़ी और उनके पुत्रों को सत्ता में बने रहने दिया जाए.

लीबिया की स्थिति को लेकर अफ्रीकी संघ का विचार है कि इस समस्या का कोई सैनिक समाधान नहीं हो सकता इसलिए बातचीत शुरू किए जाने की सख़्त ज़रूरत है.

लक्ष्य क्या है?

बीबीसी संवाददाता विल रॉस का कहना है कि जब समस्याओं और संकटों को सुलझाने के मामले में अफ्रीकी संघ की साख़ ज़्यादा अच्छी नहीं है. इस साल के आरंभ में मिस्र और ट्यूनीशिया में इसी तरह के संकट का हल निकालने के प्रयासों में अफ्रीकी संघ की धीमी प्रतिक्रिया के लिए इसकी ख़ासी आलोचना हुई थी.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption नैटो से हवाई हमले रोकने की भी अपील की गई है

लेकिन लीबिया की स्थिति को लेकर अफ्रीकी संघ कुछ पक्का इरादा दिखाता नज़र आ रहा है और उसका कहना है कि वो कर्नल मुअम्मार क़द्दाफ़ी और बेनग़ाज़ी में स्थित विद्रोही सेनाओं दोनों से ही बातचीत करने की स्थिति में है.

कुछ अफ्रीकी नेताओं में ये भावना भी देखी गई है कि लीबिया के ऊपर विमान उड़ान निषिद्ध क्षेत्र यानी नो फ्लाई ज़ोन को तो स्वीकार किया जा सकता है लेकिन हवाई हमले उससे कहीं ज़्यादा आगे की कार्रवाई है और ये हमले सुलह सफ़ाई की संभावना तलाश करने के बजाय सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य लेकर किए जा रहे हैं.

लेकिन ये भी दुविधा है कि अगर कोई भी प्रस्ताव कर्नल क़द्दाफ़ी को सत्ता से हटाने की बात नहीं करता तो उससे ये संदेश भी जा सकता है कि अफ्रीकी संघ क़द्दाप़ी को बचाने की कोशिश करने के लिए ये मध्यस्थता कर रहा है.

अफ्रीकी संघ पर ये भी आरोप लगता रहा है तमाम अफ्रीकी देशों का ये संगठन अक्सर मौजूदा नेताओं के समर्थन में खड़ा नज़र आता है और ये एक ऐसा क्लब है जो अफ्रीकी देशों के लोगों के हितों के बजाय राष्ट्रपतियों के हित साधने की ज़्यादा कोशिश करता है.

इस पूरे परिदृश्य में धन के शामिल होने से मामला और ज़्यादा जटिल होता नज़र आ रहा है. कर्नल क़द्दाफ़ी ने अफ्रीकी संघ का कई वर्षों से काफ़ी ख़र्चा उठाया है जिसके ज़रिए उन्होंने अफ्रीक में बहुत से दोस्त भी बनाए हैं. कर्नल क़द्दाफ़ी को लग सकता है कि अब उन दोस्तियों को परखने का समय आ गया है.

अफ्रीकी संघ कह चुका है कि पश्चिमी देशों ने लीबिया की स्थिति पर उसकी राय की अनदेखी है लेकिन अब ये संगठन चाहे तो इस मामले में रचनात्मक नेतृत्व संभाल सकता है.

लेकिन कर्नल क़द्दाफ़ी के सत्ता में बने रहते हुए लीबियाई विद्रोहियों को युद्धविराम के लिए राज़ी करना और कोई बातचीत शुरू कराना अफ्रीकी संघ के सामने वाक़ई एक बड़ी चुनौती है.

संबंधित समाचार