जर्मनी को एडोल्फ़ आइख़मैन का पता था

एडोल्फ आइख़मैन
Image caption एडोल्फ आइख़मैन के इस पत्र को एक जर्मन शिक्षक ने खोजा है

जर्मनी में यहूदियों को ख़त्म करने की योजना बनाने और सामूहिक हत्याओं को अंजाम देने वाले एडोल्फ़ आइख़मैन जर्मनी वापस आकर अपने कारनामों का औचित्य साबित करना चाहते थे.

उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अर्जेंटीना के किसी गोपनीय स्थान से पश्चिम जर्मनी की सरकार को इस विषय में पत्र भी लिखा था.

हाल ही में मिले दस्तावेज़ बताते हैं कि एडोल्फ़ आइख़मैन के ठिकाने के बारे में जर्मनी की तत्कालीन राजधानी बॉन के अधिकारियों को आठ साल से जानकारी थी लेकिन वे ख़ामोश रहे.

बाद में इसराइली अधिकारियों ने उन्हें ढूँढ़ निकाला और उन पर मुक़दमा चलाने के लिए उन्हें इसराइल ले गए थे.

'फ़ाइनल सोल्युशन'

दरअसल 'फ़ाइनल सोल्युशन' नात्ज़ी जर्मनी की वह सुनियोजित नीति थी जिसके तहत दूसरे विश्व युद्ध में यूरोपीय यहूदियों के सफ़ाए की नीतिगत योजना बनाई गई थी.

माना जाता है कि 'फ़ाइनल सोल्युशन' एडोल्फ़ आइख़मैन के दिमाग की ही उपज थी.

अब जाकर उनका वह पत्र सामने आया है जिसमें उन्होंने जर्मनी आकर सफ़ाई देने की इच्छा जताई थी.

एक जर्मन शिक्षक ने इस दस्तावेज़ को खोजा है जिससे ये पता चला है कि आइख़मैन ने जर्मन नेता, चांसलर एडेन्योर को 1956 में एक पत्र लिखा था.

इस पत्र में उन्होंने कहा था,''अब समय आ गया है कि मैं अपनी गुमनामी को छोड़ दूँ और ख़ुद के बारे में जानकारी दूँ.''

इस पत्र में उन्होंने अपना नाम 'एडोल्फ ओटो आइख़मैन' बताया था और कहा था कि वे हिटलर के सुरक्षा दस्ते 'एसएस' के वरिष्ठ अधिकारी थे.

जर्मनी में अचानक मिले इन काग़ज़ातों से पता चला है कि बॉन की सरकार को एडोल्फ आइख़मैन के ठिकाने का आठ साल तक पता था.

एडोल्फ ने लिखा कि वे आने वाली पीढ़ी को बताना चाहते है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने ''कार्यक्रम का नेतृत्व और निर्देशन करने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी.''

हालांकि उन्होंने इस कार्यक्रम के बारे में कुछ खुलकर नहीं बताया.

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