'वर्ल्ड सर्विस कटौती वापस ली जाए'

वर्ल्ड सर्विस लोगो
Image caption वर्ल्ड सर्विस में ब्रितानी हुकुमत की कटौती के हुक्म को लेकर वहाँ की संसद में काफ़ी सवाल खड़े हुए है.

ब्रिटेन की एक संस्दीय समिति ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में कटौती के फैसले को वापस लेने की सलाह दी है.

विदेश मामलों की समिति का कहना है कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में की गई 16 प्रतिशत की कटौती एक ग़लत क़िस्म का आर्थिक निर्णय है.

सासंदो ने वर्ल्ड सर्विस की फंडिग सरकार के बदले बीबीसी के ज़रिए किए जाने को लेकर भी चिंता जताई है और कहा है कि इससे वर्ल्ड सर्विस के भविष्य को ख़तरा है.

हुकुमत ने फैसला किया है कि 2013 से वर्ल्ड सर्विस की फंडिग, लाइसेंस के लिए जनता से लिए जानेवाले कर से किया जाएगा.

ब्रितानी मूल्य

रिपोर्ट में वित्तीय कटौती को लेकर काफ़ी कड़ा रूख़ अपनाया गया है.

सासंदो का कहना है कि वर्ल्ड सर्विस ने विश्व भर में ब्रितानी मुल्यों का प्रचार प्रसार करने में अहम भूमिका निभाई है और इसको चलाने के लिए दी जानेवाली आर्थिक सहायता उसकी तुलना में बहुत कम है.

उनका कहना है कि इसी वजह से वर्ल्ड सर्विस को दी जाने वाली वित्तीय सहायता जारी रखी जानी चाहिए.

उत्तरी अफ्रीक़ा और मध्य-पूर्व में जारी घटनाओं का हवाला देते हुए समिति ने कहा है कि वर्ल्ड सर्विस के 'साफ़्ट पावर' का फा़यदा ब्रिटेन को भविष्य में और भी अधिक हो सकता है.

सासंदो ने कहा है कि हुकुमत अगर विश्व के दूसरे देशों को दी जानेवाली ब्रितानी आर्थिक मदद में कटौती कर इसे वर्ल्ड सर्विस को देने का प्रावधान कर देता तो सर्विस में हुई कटौती को टाला जा सकता था.

लेकिन शायद सांसदो को भी लगता है कि सरकार कटौती को वापस नही लेगी.

शार्टवेव सेवाओं को मदद

सरकार को आड़े हाथों लेने के साथ-साथ उन्होंने बीबीसी प्रबंधन को कटौती इस तरह लागू करने की सलाह दी है ताकि उसका असर सेवा पर कम से कम देखने को मिले.

समिति ने ख़ासतौर पर बीबीसी हिंदी और मैंडरिन शार्ट वेव सेवाओं को लंबे समय तक आर्थिक मदद देने की सलाह सरकार को दी है.

समित का कहना है कि बीबीसी अरबी को और अधिक आर्थिक मदद दी जानी चाहिए.

समिति की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने वर्ल्ड सर्विस की अहम भूमिका को माना लेकिन उनका कहना था कि बीबीसी को भी उसी तरह की कटौती करने की ज़रूरत है जैसे की सरकारी मदद से चलनेवाली दूसरी संस्थाओं ने किया है.

उनका कहना था कि विदेश मंत्रालय की फंडिंग बंद किए जाने के बाद भी इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि बीबीसी ब्रितानी मूल्यों का ध्यान रखे.

उन्होंने कहा कि बीबीसी कोई भी सेवा हुकुमत की सलाह के बग़ैर बंद नहीं कर सकती है.

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