बेटी के क़ातिल पिता को सज़ा

फ़ाइल चित्र

अमरीका में अपनी बेटी की हत्या करने वाले एक इराक़ी आप्रवासी को एरीज़ोना में 34 साल जेल की सज़ा सुनाई गई है.

इस व्यक्ति ने अपनी बेटी नूर को इसलिए मार दिया क्योंकि उसे लगता था कि बेटी पर पाश्चात्य संस्कृति का बहुत ज़्यादा असर हो गया है.

फ़लेह अलमालेकी 90 के दशक में अपनी परिवार के साथ इराक़ से आकर अमरीका बस गए थे.

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार फ़लेह अलमालेकी चाहते थे कि उनकी बेटी नूर इराक़ी रिवाज़ों को माने लेकिन नूर किसी भी आम अमरीकी लड़की की तरह ज़िंदगी जीना चाहती थी.

बीबीसी संवाददाता की जानकारी के अनुसार जब नूर 17 साल की थी तो उसने इराक़ जाकर परिवार की मर्ज़ी से चुने लड़के से शादी करने से मना कर दिया था.

नाख़ुश पिता

दो साल बाद बेटी ने एक फ़ास्ट फूड रेस्तरां में काम करना और अकेले रहना शुरु कर दिया. उसी साल वो अपने ब्वॉयफ़्रेंड और उसकी माँ अमाल ख़लफ़ के साथ रहने लगी. बेटी का कहना था कि माता-पिता ने उसके साथ मारपीट की है.

वर्ष 2009 में नूर के पिता फ़लेह अलमालेकी ने जानबूझकर अपनी बेटी और अमाल ख़लफ़ को कार तले दबा दिया.

नूर के ब्वॉयफ़्रेंड की माँ की जान तो बच गई लेकिन 20 साल की नूर कोमा में चली गई और बाद में उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद पिता फ़लेह अलमालेकी लंदन भाग गए लेकिन अमरीका लौटने के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

अदालत में सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि अलमालेकी को अपने किए पर अफ़सोस नहीं है जिसे देखकर वे हैरान हैं.

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