इतिहास के पन्नों से

अल्बर्ट आइंस्टीन
Image caption आइंस्टीन को सदी का सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना जा सकता है.

18 अप्रैल का दिन कई कारणों से इतिहास में महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.

18 अप्रैल 1955- आइंस्टाइन का निधन

18 अप्रैल को ही जाने माने वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन की 76 वर्ष की उम्र में प्रिंसटन के एक अस्पताल में मृत्य़ु हो गई थी.

सापेक्षता के सिद्धांत के प्रवर्तक माने जाने वाले आइंस्टाइन तीन दिन से अस्पताल में भर्ती रहने के बाद चल बसे थे.

अपने जीवन के आखिरी दिनों में आइंस्टाइन अकेले रहा करते थे. हालांकि वो अंतिम समय तक प्रिंस्टन के इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस स्टडीज़ से जुड़े रहे.

यहूदी परिवार में जन्मे आइंस्टाइन बचपन से गणित में तेज़ थे लेकिन बदमाशियों के कारण उन्हे स्कूल से निकाला भी गया था. पेटेंट कार्यालय में एक क्लर्क के तौर पर काम करने के दौरान आइंस्टाइन ने अपने गणित के सिद्धांतों पर काम किया और आगे चलकर सापेक्षता के सिद्धांत का प्रतिपादन किया. 1921 में उन्हें भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

आइंस्टाइन के निधन पर अमरीकी राष्ट्रपति आइज़नहॉवर ने एक बयान जारी कर कहा था कि बीसवीं सदी को ज्ञान के मामले में जितना आइंस्टाइन ने दिया उतना शायद ही कोई दे पाएगा. आइंस्टाइन एक प्रतीक हैं ज्ञान की शक्ति का और किस तरह ज्ञान का इस्तेमाल किया जाए इस बात का भी.

18 अप्रैल 1994 रवांडा में कत्लेआम

रवांडा की राजधानी किगाली में नस्ली हिंसा का वीभत्स दौर चलता रहा. छह अप्रैल को रवांडा के राष्ट्रपति की विमान दुर्घटना में मौत के बाद कम से कम दस हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो गई.

अधिकारियों के अनुसार हुतु कबीले के सैनिक सड़कों पर तुत्सी कबीले के आम लोगों को खोज खोजकर कुल्हाडी़ से मार रहे थे.

इंटरनेशनल कमिटी फॉर रेड क्रास के अनुसार लाखों की संख्या में रवांडा निवासियों ने घर छोड़ दिए थे क्योंकि क़रीब चार हज़ार तुत्सी विद्रोही राजधानी में घुस आए थे. तुत्सी विद्रोहियों और हुतु सैनिकों के बीच कत्लेआम में हज़ारों की संख्या में लोग मारे गए.

18 अप्रैल 1996 काहिरा में विदेशी पर्यटकों की हत्या

इसी दिन काहिरा में अज्ञात हमलावरों ने ग्रीस के 17 टूरिस्टों और उनके स्थानीय गाइड को गोलियों से भून दिया था.

यूरोपा होटल के बाहर हुई इस घटना में कम से कम 15 लोग घायल हुए थे.

अज्ञात हमलावरों ने उस समय टूरिस्टों पर गोलियां बरसाईं जब वो घूमने के लिए निकल रहे थे और बस में सवार हो रहे थे.

इस हमले की अभी तक किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन माना जाता है कि यह इस्लामी चरमपंथियों का काम था जो मिस्र की सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश में जुटे हुए थे.

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