भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ माओवादी 'अपील'

Image caption माओवादी पार्टी का झंडा

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना हज़ारे के सफल आंदोलन के बाद कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने भी भारत की जनता से एकजुट होकर इसके ख़िलाफ़ उग्र आंदोलन चलाने की अपील की है.

अपनी प्रेस विज्ञप्ति में पार्टी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों, नौकरशाहों और यहाँ तक की न्यायिक व्यवस्था पर भी तीखा प्रहार किया है. साथ ही पार्टी का कहना है कि लोकपाल बिल के लिए समिति बना देने या क़ानून में बदलाव से भ्रष्ट्राचार ख़त्म नहीं होगा. पार्टी ने भ्रष्ट्राचार के लिए पूंजीवादी व्यवस्था को दोषी ठहराया है.

विज्ञप्ति में लिखा गया है, “कांग्रेस और भाजपा जैसे मुख्य राजनीतिक दल, राजद, बीएसपी, एसपी, डीएमके, एआईएडीएमके, टीडीपी जैसी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं,मंत्रियों और तमाम नौकरशाहों के भ्रष्ट आचरण का लंबा इतिहास रहा है. आज़ाद भारत के इतिहास में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं देखा गया है जहां भ्रष्ट राजनेता, मंत्री, बड़े उद्योगपति और नौकरशाहों को माकूल सज़ा दी गई हो.”

न्यायिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए पार्टी ने कहा है कि ‘इस देश की न्यायपालिका भी शोषणपरक राजव्यवस्था’ का अभिन्न हिस्सा है.

'पूंजीवाद है ज़िम्मेदार'

Image caption माओवादी कैंप

भ्रष्टाचार के मसले पर पार्टी ने कहा है कि अन्ना हज़ारे की भूख हड़ताल को व्यापक जन समर्थन मिला जो भ्रष्टाचार,भ्रष्ट राजनीतिक दल और उनके नेताओं के ख़िलाफ़ जनता के गहरे असंतोष की स्वाभाविक परिणति है.

लेकिन लोकपाल बिल के लिए बनी समिति पर अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए विज्ञप्ति में कहा गया है, “अगर कोई ये सोचता है कि लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए समिति बना देने और इस समिति के आधे सदस्य नागरिक समाज से चुन लेने से भ्रष्टाचार की समस्या का समाधान हो जाएगा तो ये बेहद नादानी भरी सोच ही कही जाएगी.”

पार्टी ने लिखा है कि,'' भ्रष्टाचार कुछ बुरे और लालची व्यक्तियों तक सीमित मसला नहीं है. भ्रष्टाचार की असली वजह पूंजीवादी व्यवस्था है जिसका एकमात्र मक़सद मुनाफ़ा कमाना है. पूंजीवाद दरअसल मजदूरों के गहन शोषण,रिश्वत और कमीशन पर ही निर्भर है. इसलिए मौजूदा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत किया जा सकता है.''

सीपीआई(माओवादी) का कहना है कि जो घोटाले अब तक उजागर हुए हैं उनके मुक़ाबले वे घोटाले कई गुना ज़्यादा बड़े हैं जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं.

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