सीरिया में आपातकाल क़ानून हटाने का फ़ैसला

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सीरिया की सरकार ने क़रीब 55 साल से देश में मौजूद राष्ट्रीय आपातकाल क़ानून को हटाने का फ़ैसला किया है. इस बारे में हुई एक सरकारी घोषणा में यह भी कहा गया है कि सरकार सुरक्षा कोर्ट को भी ख़त्म करेगी.

इस कोर्ट में राजनीतिक क़ैदियों के ख़िलाफ़ मुक़दमे चलते हैं. सरकार ने नई पहल करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति देने वाले क़ानून को मंज़ूरी दे दी गई है.

सीरिया में सुधार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की एक अहम मांग थी कि आपातकाल क़ानून को ख़त्म कर दिया जाए.

इससे पहले देश के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहम्मद इब्राहिम अल-शार ने लोगों को किसी भी सरकार विरोधी प्रदर्शन और धरने में हिस्सा लेने को लेकर चेतावनी दी थी.

क़ानून

उन्होंने कहा था, "ऐसी स्थिति में लोगों की सुरक्षा और देश की स्थिरता के लिए प्रदर्शनकारियों पर सीरिया का क़ानून लागू होगा."

बीबीसी संवाददाता ओवेन बेनेट जॉन्स का कहना है कि इस कथित परस्पर विरोधी क़दमों से यह पता चलता है कि सीरियाई राजनीति के सर्वोच्च स्तर पर बड़ी बहस चल रही है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ संकेत ये है कि प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट करने के लिए आपातकाल क़ानून हटाना पर्याप्त नहीं.

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के ख़िलाफ़ अभियान के दौरान क़रीब 200 लोग मारे जा चुके हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि होम्स शहर में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों ने लोगों को खदेड़ने के लिए गोलियाँ चलाईं.

सोमवार को देश के तीसरे बड़े शहर होम्स में क़रीब पाँच हज़ार प्रदर्शनकारियों ने क्लॉक स्क्वेयर पर कब्ज़ा कर लिया था. ये घटना 12 प्रदर्शनकारियों को सामूहिक रूप से दफ़नाने के बाद हुई, जो कथित रूप से सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारे गए थे.

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