फ़्रांस-इटली भी भेजेंगे सैन्य अधिकारी

फ़्रांस का लड़ाकू जहाज़ इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने कहा है कि वे गद्दाफ़ी की सेना के ख़िलाफ़ हवाई हमलों में तेज़ी लाएंगें.

लीबिया में सैनिक अधिकारियों को भेजने की ब्रिटेन की घोषणा के बाद फ़्रांस और इटली ने भी अपने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को लीबिया भेजने का फ़ैसला किया है.

फ़्रांस के एक सरकारी प्रवक्ता फ़्रांसे बरोइन ने कहा कि ये अधिकारी लीबिया में नागरिकों को बचाने के लिए विद्रोहियों के साथ काम करेंगें.

उनका कहना था कि ये फ़ैसला लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के नियमानुसार है.

फ़्रांस और इटली का कहना है कि ये अधिकारी लीबियाई विद्रोहियों को सलाह देने का काम करेंगें.

जहां फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि वो 10 से कम अधिकारियों की टुकड़ी लीबिया भेजेंगें, वहीं इटली के रक्षा मंत्री ने 10 सैन्य अधिकारियों को वहां भेजने की घोषणा की है.

मंगलवार को ब्रिटेन ने कहा था कि वो अपने सैन्य अधिकारियों की एक टीम लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में भेजेगी.

लीबिया के विदेश मंत्री ने इस योजना की निंदा की है और चेतावनी दी है कि ऐसा करने से लीबिया में तनाव बढ़ सकता है.

इस बीच फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा है कि वे गद्दाफ़ी की सेना के ख़िलाफ़ हवाई हमलों में तेज़ी लाएंगें.

ज़मीनी हालात

ट्यूनिशिया और मिस्र की क्रांति से प्रभावित सरकार विरोधी विद्रोही गत फ़रवरी से कर्नल गद्दाफ़ी की सेना से लड़ रहे हैं.

बेनग़ाज़ी में स्थित विद्रोहियों के क़ब्ज़े में लगभग पूरा पूर्वी लीबिया है, जबकि त्रिपोली और लगभग पूरे पश्चिमी लीबिया पर कर्नल गद्दाफ़ी की सेना का क़ब्ज़ा है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption ट्यूनिशिया और मिस्र की क्रांति से प्रभावित सरकार विरोधी विद्रोही गत फ़रवरी से करनल गद्दाफ़ी की सेना से लड़ रहे हैं.

नेटो की सेना लीबिया में उड़ान-निषेध क्षेत्र लागू करने की कोशिश में वहां हवाई हमले कर रहे हैं.

बुधवार को लीबियाई सरकारी टेलीविज़न ने ख़बर चलाई कि नेटो के विमान टेलिकॉम और संचार संसाधनों पर हमले कर रही हैं.

फ्रांस के सरकारी प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि फ़्रांस की मंशा लीबिया में सेना तैनात करने की नहीं है.

हालांकि रक्षा मंत्री जिरॉर्ड लॉंगेट ने कहा कि सेना की तैनाती का मुद्दा एक ‘गंभीर मुद्दा’ है और संयुक्त राष्ट्र को इस पर विचार करना चाहिए.

पैरिस में बीबीसी संवादादाता ह्यू शोफ़ील्ड का कहना है कि ब्रिटेन की तरह ही फ़्रांस में भी लीबिया में जारी मुहिम को लेकर चिंता बनी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में लीबिया पर एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत लीबिया के नाग़रिकों की सुरक्षा के लिए नेटो के देशों को हर ज़रुरी क़दम उठाने की इजाज़त दी गई थी.

इस प्रस्ताव में हवाई हमले की इजाज़त तो दी गई थी, लेकिन ज़मीनी हमलों को अधिकृत नहीं किया गया था.

लीबिया के विदेश मंत्री अब्दुल अती अल ओबेदी ने कहा कि बाहरी सेना की लीबिया में मौजूदगी पीछे की ओर क़दम रखने जैसा होगा.

उन्होंने युद्धविराम का प्रस्ताव देते हुए कहा कि युद्धविराम के छह महीने के बाद संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में लीबिया में चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जिन देशों ने लीबिया का हाल ही में दौरा किया है, उन्होंने युद्धविराम का समर्थन किया है और मानवतावादी काम में सहयोग की भी बात कही है.

उन्होंने ब्रिटेन, फ़्रांस और इटली के बारे में कहा कि वे युद्धविराम के प्रस्ताव को ले कर उन्हें सहयोग नहीं दे रहे हैं.

संबंधित समाचार