सत्ता संवैधानिक तरीके से छोड़ी जाएगी :सालेह

अली अब्दुल्ला सालेह
Image caption राष्ट्रपति सालेह ने बीबीसी को विशेष इंटरव्यू दिया है.

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने कहा है कि वो संवैधानिक तरीके से ही सत्ता छोड़ेंगे और सत्ता एकबारगी प्रदर्शनकारियों के हाथों में नहीं सौंपी जा सकती है.

बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में सालेह ने अपने ख़िलाफ़ कई हफ्तों से चले आ रहे प्रदर्शनों को तख्तापलट क़रार दिया.

सालेह की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वो इस शर्त पर सत्ता छोड़ने को राज़ी हुए हैं कि उनके ख़िलाफ़ न कोई मामला बनाया जाएगा और न ही कोई कार्रवाई की जाएगी.

विपक्षी दलों ने उस योजना का स्वागत किया है जिसके तहत सालेह सत्ता छोड़ने को राज़ी हुए हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सालेह तुरंत सत्ता छोड़ कर जाएं.

राजधानी सना में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का दौर अभी थमा नहीं है और देश के कई और शहरों में रविवार को भी प्रदर्शन हुए हैं.

सना में प्रदर्शनकारियों का नारा ही था- कोई बातचीत नहीं, कोई वार्ता नहीं- इस्तीफ़ा दो भाग जाओ.

पिछले दो महीने से यमन में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं जिसमें 130 लोग मारे जा चुके हैं.

राष्ट्रपति सालेह ने बीबीसी से कहा कि प्रदर्शनों के जारी रहने से देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है.

उन्होंने कहा, ‘‘ अमरीका और यूरोप में बैठ कर मेरे इस्तीफ़े की मांग हो रही है. मैं किसे सत्ता सौंप दूं जो तख्तापलट की कोशिश में हैं उन्हें. नहीं ऐसा नहीं करुंगा मैं. हम बैलेट बॉक्स और जनमत संग्रह के ज़रिए सत्ता परिवर्तन करेंगे. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को बुलाया जाएगा.’’

उनका कहना था कि वो संवैधानिक वैधता के पक्षधर हैं और किसी भी तरह के तख्तापलट को खारिज करते हैं और अराजक स्थिति पैदा नहीं होने देंगे.

सालेह ने अल क़ायदा का भी राग छेड़ा और कहा कि प्रदर्शनकारियों में अल क़ायदा के तत्व भी शामिल हैं.

उनका कहना था, ‘‘ अल क़ायदा प्रदर्शनकारियों में शामिल हो रहे हैं. यह ख़तरनाक है.पश्चिमी देश ये बातें क्यों नहीं देख रहे हैं कि इसका भविष्य में क्या असर होगा.’’

सालेह की सत्ता छोड़ने की पूरी योजना सऊदी अरब और खाड़ी के पाँच देशों ने मिलकर बनाई है जिसके तहत सालेह विपक्ष के साथ समझौते के बाद सत्ता उपराष्ट्रपति को सौंपेंगे. इसके दो महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे.

समझौते के तहत सालेह, उनके परिवार और सहयोगियों पर किसी तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा.

सत्तारुढ जनरल पीपुल्स कांग्रेस पार्टी ने इस योजना को स्वीकार कर लिया है. विपक्षी दलों ने भी इसका स्वागत किया है लेकिन उन्होंने कहा है कि वो राष्ट्रीय एका सरकार में शामिल नहीं होंगे.

संसद में विपक्षी दल भले ही योजना पर राज़ी हों लेकिन सालेह के विरोधी इस योजना को नहीं मान रहे हैं और शक जता रहे हैं कि सालेह शायद ही इस योजना पर अमल करें.

विरोधियों का मानना है कि खाड़ी देशों की योजना पूरे मामले को दो राजनीतिक दलों के मतभेद के रुप में देख रही है जबकि मामला पूरे देश का है.

संबंधित समाचार