चेर्नोबिल हादसे की 25वीं वर्षगांठ

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Image caption चेर्नोबिल हादसे में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी लेकिन ग़ैर आधिकारिक आँकड़ें ज़्यादा बताए जाते हैं

यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में हुए दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हादसे की मंगलवार को 25वीं वर्षगांठ है.

26 अप्रैल वर्ष 1986 में चेर्नोबिल के नंबर चार रिएक्टर में धमाका हुआ था जिसके बाद विकिरण पूरे यूरोप तक फैल गई थी.

घटना के तुरंत बाद कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी.इसके बाद विकिरण से हुई बिमारियों में कई लोग मारे गए हालांकि उनकी संख्या को लेकर मतभेद हैं.

ये वर्षगांठ ऐसे समय आई है जब परमाणु ऊर्जा को लेकर दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे है और जापान के लोग फुकुशिमा के परमाणु संयंत्र में हुई घटना के बाद विकिरण से होने वाले ख़तरों के जूझ रहे हैं.

जब यूक्रेन के शहर चेर्नोबिल में परमाणु हादसा हुआ था उस समय वह सोवियत संघ का भाग हुआ करता था.

चिंता

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Image caption सोमवार को हज़ारों लोगों ने फ्रांस और जर्मनी में परमाणु उर्जा को ख़त्म करने के लिए प्रदर्शन किया

इस हादसे की वजह से यूक्रेन, पश्चिमी रूस और बेलारूस में रह रहे लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.तत्कालीन सोवियत संघ के अधिकारियों ने हादसे की रिपोर्टिग पर भी रोक लगा दी थी.

पूर्व सोवियत संघ के इंजीनियरों ने विकिरण के ख़तरे को कम करने के लिए एक अस्थाई कॉंक्रीट का घेरा बना दिया था. लेकिन बचाव के लिए एक अब और नए कवच की ज़रूरत है क्योंकि पहला घेरा पुराना हो चुका है.

अब भी इस प्लांट के 30 किलोमीटर के दायरे में किसी को जाने की अनुमति नहीं है.

वहाँ इस्तेमाल किए जा चुके ईधन के भंडारण का निर्माण करने के लिए पिछले हफ्ते यूक्रेन के कीव में डोनर कांन्फ्रेस में पाँच करोड़ 55 करोड़ यूरो इकट्ठा किए गए थे. लेकिन इस काम के लिए 74 करोड़ यूरो की ज़रूरत है.

इस बीच रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि परमाणु आपातकाल के दौरान ज़्यादा पारदर्शिता दिखानी चाहिए.

उनका कहना था, "मुझे लगता है कि हमारे आधुनिक देशों को चेर्नोबिल में जो हुआ और हाल ही में जापान के फुकुशिमा में जो हादसा हुआ उससे सबक लेना चाहिए क्योंकि लोगों को सच्चाई बताना बेहद ज़रूरी है."

दिमित्री मेदवेदेव मंगवार को चर्नोबिल में रहेंगे.सोमवार को हज़ारों लोगों ने फ्रांस और जर्मनी में परमाणु उर्जा को ख़त्म करने के लिए प्रदर्शन किया.

लोगों ने परमाणु विरोधी बैनर लहराए और 'चेर्नोबिल और फुकुशिमा दोबारा न हो के नारे लगाए'.

भारत के जैतापुर में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है. यहां भी लोग परमाणु संयंत्र लगाने का विरोध कर रहे है.

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