इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों में 27 अप्रैल के दिन कई घटनाएँ दर्ज हैं.

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Image caption रूस और अमरीका की सेनाओं का मिलन

दूसरे विश्वयुद्ध के कारण 1945 में यूरोप घृणा की आग में जल रहा था. नात्सी नेता हिटलर की सेनाओं के ख़िलाफ़ सोवियत संघ, ब्रिटेन और अमरीका मोर्चा बाँधे हुए थे. 27 अप्रैल को जर्मनी में एल्बे नदी के किनारे सोवियत और अमरीकी सैनिकों की पहली बार मुलाक़ात हुई.

मॉस्को, लंदन और वॉशिंगटन से एक साथ बयान जारी किए गए कि तीनों शक्तियाँ हिटलर की थर्ड रीख़ को नेस्तोनाबूद करने के लिए कटिबद्ध हैं.

दोनों सेनाओं के मिलन से हिटलर की सेनाएँ दो हिस्सों में विभक्त हो गईं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने घोषणा की, “चलो सब दुश्मन पर चढ़ाई करो.”

वहीं सोवियत नेता जोज़फ़ स्तालिन ने घोषणा की, “दुश्मन ताक़तों का सर्वनाश हमारा फ़र्ज़ है. हम उसे हथियार डालने और बिना शर्त आत्मसमर्पण पर मजबूर करेंगे. सभी आज़ादी पसंद लोगों के प्रति लाल सेना की ये ज़िम्मेदारी है और वो ये काम पूरा करेगी.”

1984: लीबिया दूतावास पर क़ब्ज़ा समाप्त

लंदन के सेंट जेम्स स्क्वेयर पर स्थित लीबियाई दूतावास पर 11 दिन तक चले क़ब्ज़े का अंत हुआ और वहाँ बंधक बनाए गए कूटनयिक चल कर बाहर आ गए.

इस क़ब्ज़े की शुरुआत एक महिला पुलिसकर्मी ईवॉन फ़्लैचर की हत्या के साथ ही शुरू हुई, जिन्हें दूतावास के बाहर गोली मार दी गई थी.

लीबियाई दूतावास पर हुई कार्रवाई के बदले में लीबिया के शासक कर्नल मुअम्मार ग़द्दाफ़ी ने त्रिपोली के ब्रितानी दूतावास की भी घेरेबंदी कर दी थी.

जब लंदन से लीबियाई कूटनयिक रिहा किए गए तभी त्रिपोली से भी ब्रितानी कूटनयिक रिहा हुए.

दोनों देशों ने एक दूसरे के राजदूतों को निकाल दिया और आपस में कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए.

1961: सियरा लिओन आज़ाद हुआ

डेढ़ सौ साल तक ब्रिटेन के अधीन रहा पश्चिम अफ़्रीक़ी देश सियरा लिओन 27 अप्रैल 1961 में आज़ाद हो गया.

आधी रात को इस देश का हरी, सफ़ेद और नीली पट्टियों वाला झंडा फहराया गया.

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