'अमरीका से दूर होने की पाक सलाह'

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अफ़ग़ानिस्तान से कहा है कि वो तालिबान से शांतिवार्ता शुरू करे और इसके लिए अमरीका से सामरिक सहयोग करने की बजाए पाकिस्तान और उसके मित्र राष्ट्र चीन की ओर झुकाव बढ़ाए.

अमरीका के प्रतिष्ठित अख़बार वॉल स्ट्रीट जरनल में छपी इस ख़बर से पाकिस्तान के सत्तातंत्र में हड़कंप मचा हुआ है.

वॉशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने ट्विटर के ज़रिए इस ख़बर का खंडन किया है.

उन्होंने लिखा है, “ये रिपोर्टें ग़लत हैं कि गिलानी-करज़ई के बीच बातचीत के दौरान पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान से कहा कि अमरीका से दूरी बनाए.”

हुसैन हक़्क़ानी ने लिखा है कि इस बारे में “उच्चतर स्तर पर” (यानी प्रधानमंत्री के स्तर पर) बात हुई है और ये रिपोर्ट ग़लत है.

सलाह

वॉल स्ट्रीट जरनल अख़बार ने लिखा है कि काबुल यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई से 16 अप्रैल को हुई आमने सामने की बातचीत में ये बात रखी थी.

अख़बार ने लिखा है कि प्रधानमंत्री गिलानी ने करज़ई से साफ़ साफ़ कहा कि 2014 के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी फ़ौजी अड्डे बनाए रखने का विचार वो छोड़ दें.

इस यात्रा में पहली बार प्रधानमंत्री के अलावा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कयानी और आईएसआई प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा भी शामिल थे.

अख़बार ने इस बैठक के दौरान मौजूद अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले से बातचीत का ब्यौरा छापा है.

अख़बार लिखता है कि अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य में अमरीकी दखल को काटने की पाकिस्तान की इस कोशिश से ज़ाहिर होता है कि दस साल पुराने युद्ध को अपनी शर्तों पर ख़त्म करने की अमरीकी कोशिशों में अब अड़चनें आएँगी.

प्रभाव की कोशिशें

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय फ़ौजें 2014 में लौटेंगी

अमरीका ने एलान किया हुआ है कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमरीकी नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय फ़ौजों के ज़्यादातर सैनिक 2014 में अपने अपने देश लौट जाएँगे.

अख़बार ने लिखा है इसे ध्यान में रखते हुए अफ़ग़ानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए ईरान, भारत और रूस ने कोशिशें शुरू कर दी हैं.

अख़बार पाकिस्तान की बेचैनी की यही वजह बताता है.

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने हामिद करज़ई से मुलाक़ात के दौरान बार बार अमरीका के “साम्राज्यवादी षडयंत्र” का ज़िक्र किया.

अफ़ग़ानिस्तान के प्रधानमंत्री हामिद करज़ई ने इस बीच लगातार अमरीका की आलोचना की है और अपने देश में उसकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

अख़बार के अनुसार इसे अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है.

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