तिब्बती करेंगे प्रधानमंत्री की घोषणा

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Image caption दलाई लामा आध्यात्मिक नेता बने रहेंगे

भारत स्थित निर्वासित तिब्बतियों की सरकार अपना नया राजनीतिक नेता चुनने जा रही है.

पूरी दुनिया में रह रहे हज़ारों तिब्बती शरणार्थियों के मतदान के बाद बुधवार को नए 'प्रधानमंत्री' के नाम की घोषणा की जाएगी.

पिछले महीने ही दलाई लामा ने कहा था कि वह तिब्बती आंदोलन की ज़िम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपना चाहते हैं.

दलाई लामा के मठ और मंदिर के मुख्य द्वार के सामने लोबसाँग साँगे के चुनाव पोस्टर लगे हैं. इनके बारे में उम्मीद जताई जा रही है कि वह अगले प्रधानमंत्री होंगे.

चालीस से ज़्यादा वसंत देख चुके लोबसाँग साँगे का जन्म भारत में हुआ था लेकिन अब वह अमरीका में रहते हैं और हार्वर्ड विश्व विद्यालय में अध्यापक हैं.

नौ मार्च 1959 को तिब्बतियों ने चीन के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था. विफल विद्रोह के बाद कई तिब्बती सीमा पार कर भारत आ गए थे. तब से हज़ारों तिब्बती धर्मशाला में रह रहे हैं और दलाई लामा तिब्बती लोगों की निर्वासित सरकार के मुखिया हैं.

दलाई लामा कहते रहे हैं कि वह तिब्बत के लिए आज़ादी नहीं बल्कि अर्थपूर्ण स्वायत्तता चाहते हैं.

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