इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों में 28 अप्रैल का दिन राजनीतिक उथल पुथल के दिन की तरह याद किया जाएगा. दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हादसे की बात भी 28 अप्रैल के दिन ही सोवियत संघ ने स्वीकार की थी.

1945: मुसोलिनी की हत्या

Image caption मुसोलिनी इटली के तानाशाह थे

इटली के तानाशाह बेनितो मुसोलिनी, उनकी प्रेमिका क्लारा पेटाची और उनके कुछ सहयोगियो की हत्या 28 अप्रैल 1945 को हुई थी.

उनके शवों को इटली के मिलान शहर ले जाया गया था. मिलान में टाईम्स अख़बार के संवाददाता के अनुसार इन शवों को बेहद भद्दे तरीके से एक चौराहे पर नुमाईश के लिए टांग दिया गया था.

मुसोलिनी विरोधी पार्टीसान गुट के प्रमुख ने कहा था कि ऐसी घटनाएँ अफ़सोसनाक हैं लेकिन ये तानाशाही के ख़िलाफ़ लोगों के ग़ुस्से को दर्शाता है. उनका कहना था कि आतताई तानाशाह मुसोलिनी के ख़िलाफ़ लोगों का ये कदम ग़लत नहीं है.

1986: सोवियत संघ ने परमाणु हादसे की बात मानी

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Image caption चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुआ था हादसा

25 अप्रैल को युक्रेन के चेरनोबिल में हुए परमाणु दुर्घटना के दो दिन के बाद सोवियत संघ ने हादसे की बात मानी थी. आधिकारिक समाचार एजेंसी टास की रिपोर्ट ने कहा था कि हादसे में लोग हताहत हुए हैं लेकिन संख्या पर उन्होने कोई जानकारी नहीं दी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि घायलों को सहायता पहुंचाई जा रही है.

स्वीडन, फ़िनलैंड और नौरवे ने दो दिन पहले पर्यावरण में रेडियोधर्मी गतिविधियों में अचानक बढ़त की खबर दी थी और उसके दो दिनों के बाद ये रिपोर्ट इस भयानक हादसे की पहली पुष्टि थी.

1996: तसमानिया में बंदूकधारी का क़हर

ऑस्ट्रेलिया के द्वीप तसमानिया में एक गेस्ट हाउस को हथिरयारबंद पुलिस ने घेर लिया जहां एक बंदूकधारी ने तीन लोगों को बंधक बना लिया था.बंदूकधारी ने पर्यटक शहर पोर्ट आर्थर में 32 लोगों को गोली से मारने के बाद गेस्टहाउस के मालिक और एक मेहमान को बंदी बना लिया था.

पोर्ट आर्थर की भंयकर त्रासदी ने पूरे ऑस्ट्रेलिया में हड़कंप मचा दिया. ऑस्ट्रेलिया के हाल फ़िलहाल के इतिहास का ये सबसे बड़ा सामूहिक जनसंहार माना जाता है.

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