सीरिया में सरकार विरोधी प्रर्दशन तेज़, 60 की मौत

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Image caption सीरिया में पिछले ढेढ़ महीनों में प्रजातंत्र समर्थक प्रर्दशनों में तेज़ी आई है.

सीरिया में हज़ारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राजधानी डेमस्कस और देश भर में रैलियाँ आयोजित की जिसके दौरान मानवधिकार संस्थाओं के अनुसार कम से कम 60 लोग मारे गए हैं.

सीरिया में जारी लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों पर नज़र रखनेवाली लंदन स्थित संस्था का कहना है कि इनमें से लगभग आधी मौतें दक्षिणी शहर डेरा और आसपास के इलाक़ों में हुईं जहाँ सुरक्षा दस्तों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं.

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पिछले डेढ़ महीनों के भीतर आयोजित प्रजातंत्र समर्थक प्रदर्शनों मे क़रीब 500 लोग मारे गए हैं.

अधिकारियों का कहना कि प्रदर्शनकारियों ने पाँच जवानों की हत्या कर दी है.

डेमस्कस से उत्तर में बसे होम्स और तटीय शहर लताक़िया में भी आम लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

इस बीच अमरीका ने सीरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया है. सीरिया की गुप्तचर एजेंसी और राष्ट्रपति बशर अल असद के दो रिश्तेदारों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है.

फ़ायरिंग

डेरा को सुरक्षा दस्तों ने सोमवार से ही चारों ओर से घेर रखा है और वहाँ तोपें भी तैनात हैं.

चश्मदीदों ने कहा कि दस्तों ने डेरा शहर की तरफ़ जाकर गांववालों पर फ़ायरिंग की.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अस्पताल के सूत्रों के हवाले से कहा है कि वहाँ गोलियों से छलनी 15 शव पहुँचाए गए हैं.

राजधानी डेमस्कस में जुमा की नमाज़ ख़त्म होने तक लगभग शहर की सभी गलियों और सड़कों पर मौजूद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

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Image caption प्रर्दशनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग को लेकर सीरिया की विश्वभर में निंदा हो रही है.

डेमस्कस से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कुछ लोग शहर की मुख्य मस्जिद के पास सरकार विरोधी नारे लगाने के लिए जुटे थे लेकिन इमाम ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी और भीड़ छंट गई.

संवाददाता के अनुसार शहर में कुछ अंजान लोग लाठियाँ लिए घूम रहे थे और पुलिस गाड़ियों की तलाशी ले रही थी.

होम्स, उत्तरी क़ामिसी और तटीय शहर लताक़िया और बानियास में भी रैलियाँ आयोजित होने के समाचार हैं.

होम्स और लताक़िया में भी प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाए जाने की अपुष्ठ ख़बरें हैं.

समर्थन

इस सप्ताह हो रहे प्रदर्शनों को इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन हासिल है.

राष्ट्रपति असद के पिता ने मुस्लिम ब्रदरहुड पर 1980 में प्रतिबंध लगा दिया था.

ऐसी अपुष्ठ ख़बरे भी हैं कि सुरक्षाबलों के भीतर भी सरकार के रवैये को लेकर मतभेद हैं और कई बार जवानों ने प्रर्दशनकारियों पर बल प्रयोग से मना कर दिया है.

बुधवार को सत्ताधारी बाथ पार्टी के 200 सदस्यों ने इसी मामले पर त्यागपत्र दे दिया है. उन्होंने सरकार की दमनकारी नीतियों के ख़िलाफ़ एक बयान भी जारी किया है.

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Image caption हाल के दिनों में अरब क्षेत्र मे हुए विरोध प्रर्दशनों में महिलाओं ने ख़ूब बढ-चढ़कर हिस्सा लिया है.

जोर्डन मे पुलिस का कहना है कि सीरिया की सीमा से लगे इलाके़ में जोर्डन के सैकड़ो नागिरकों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगाए.

सीरिया की सरकारी मीडिया का कहना है झड़पों में चार जवानों की मौत हो गई और शुक्रवार को डेरा चौकी पर हुए 'आतंकवादी' हमले में दो सुरक्षाकर्मियों को बंदी बना लिया गया है.

इन सभी ख़बरों की पुष्टि नहीं की जा सकी है.

संयुक्त राष्ट्र

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार समिति ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुकुमत के बल प्रयोग की निंदा की है और इनकी जाँच संयुक्त राष्ट्र दल से करवाए जाने की मांग की है.

ये मांग समिति की एक आकस्मिक बैठक में उठाई गई.

बैठक अमरीका की पहल पर बुलाई गई थी जो इस मामले पर और कड़े रूख़ की मांग कर रहा है.

रूस, चीन और पाकिस्तान के नेतृत्व में साथ आए कई मुस्लिम देशों ने अमरीका की आधिकारिक जाँच की मांग को दख़्लअंदाज़ी क़रार दिया है.

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