पाकिस्तान सवालों के घेरे में

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ऐबटाबाद में अमरीकी कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अब पाकिस्तान को अमरीका के काफ़ी तीखे और चुभते सवालों का सामना करना पड़ रहा है.

अमरीकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका पर उंगली उठाई है और कुछ ने तो उसे दी जानेवाली आर्थिक मदद की फिर से समीक्षा करने की मांग की है.

सेनेट में आंतरिक सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जो लिबरमैन ने एक बयान जारी करके कहा है: “पाकिस्तान के लिए ये काफ़ी दबाव का वक्त होगा क्योंकि उन्हें हमें ये साबित करना होगा कि ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी के बारे में उन्हें पता नहीं था.”

लादेन से जुड़ी तस्वीरें

उसी समिति की रिपबलिक्न सदस्य सूज़न कॉलिंस ने पाकिस्तान को सैनिक मदद के तौर पर दी जाने वाली अरबों डॉलर की मदद पर “कड़े शर्त” लगाने की मांग की है.

उनका कहना था, “इस घटना से एक बार फिर ये साफ़ होता है कि पाकिस्तान हमारे साथ दोहरा खेल खेल रहा है और मेरे लिए ये काफ़ी चिंता की बात है.”

डेमोक्रैट सेनेटर फ़्रैंक लॉटेनबर्ग का कहना था कि पाकिस्तान को एक पैसा देने से भी पहले अब ये स्पष्ट हो जाना चाहिए कि क्या वो सचमुच आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के साथ है.

रिश्तों में तनाव

साल 2001 के बाद से अमरीकी कांग्रेस ने पाकिस्तान को सीधे अनुदान और फ़ौजी मदद की तौर पर 20 अरब डॉलर दिए हैं.

इसमें से ज़्यादातर पाकिस्तानी फ़ौज के साथ संबंध बेहतर बनाने के मकसद से जारी किया गया है और इसके पीछे सोच ये रही है कि इससे अमरीका को ओसामा बिन लादेन जैसे चरमपंथियों से लड़ने में मदद मिलेगी और साथ ही पाकिस्तान भी स्थिरता की ओर बढ़ेगा.

सेनेट की ही एक प्रभावशाली समिति के अध्यक्ष कार्ल लेविन ने कहा है कि पाकिस्तान को दी जानेवाली सैनिक मदद अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वो ऐबटाबाद के मुख्य इलाके में बिन लादेन की मौजूदगी का क्या जवाब देता है.

साल 2009 में पाकिस्तान को अगले पांच सालों तक हर साल डेढ़ अरब डॉलर असैनिक अनुदान को पारित करने में अहम भूमिका निभानेवाले सांसद हावर्ड बर्मैन ने कहा कि सैनिक अनुदान को लेकर तो उन्हें ओसामा के मारे जाने से पहले भी शंकाएं थीं.

उनका कहना था, “मुझे चिंता इस बात की हो रही है कि हम एक ऐसी फ़ौज की मदद कर रहे हैं जो अपने दुश्मन के बारे में वो राय नहीं रखता जो हमारी राय है.”

राष्ट्रपति बराक ओबामा या उनकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने खुलकर पाकिस्तान की आलोचना नहीं की है लेकिन उनके प्रशासन के उच्च अधिकारी ने सवाल उठाए हैं.

अविश्वास बढ़ा

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Image caption पाकिस्तान में ओसामा के समर्थन में रैलियां हुई हैं.

उनके आंतकवाद विरोधी मामलों के सलाहकार जॉन ब्रेनन ने पत्रकार वार्ता में कहा कि ऐबटाबाद में मिलिट्री एकेडमी से लगभग सौ मीटर की दूरी पर स्थित मकान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी पाकिस्तानी अधिकारियों पर कई सवाल खड़े करती है.

ब्रेनन का कहना था, “ये मानना मुश्किल है कि बिन लादेन को पाकिस्तान के अंदर कोई मदद नहीं मिल रही थी.”

पाकिस्तान सरकार या आईएसआई की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है लेकिन अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने सीएनएन टीवी चैनल से कहा है कि पाकिस्तान को ओसामा के छिपे होने के बारे में कुछ नहीं पता था.

हक्कानी का कहना था, “यदि हमें पता होता हम पहले ही कार्रवाई कर चुके होते. लेकिन हमें खुशी है कि हमारे अमरीकी दोस्तों ने ये कार्रवाई की है.”

अमरीका और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही कई मामलों को लेकर तनाव से गुज़र रहे हैं. इसी हफ़्ते दोनों देशों के रिश्तों पर सेनेट में बहस भी होनी है.

विदेश नीति से जुड़ी बेवसाइट फॉरेनपॉलिसी डॉट कॉम पर एक लेख में पाकिस्तानी विश्लेषक शुजा नवाज़ ने लिखा है कि यदि ये कार्रवाई पाकिस्तान को बिना बताए हुई है तो दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ेगा.

उन्होंने लिखा है, “यदि ये कार्रवाई एक साथ मिलकर हुई है तो रिश्ते बेहतर होंगे लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो रिश्तों में और ढलान आएगी क्योंकि वाशिंगटन में फ़िलहाल पाकिस्तान के प्रति अविश्वास का माहौल है.”

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