'सीआईए को सूचना लीक होने का डर था'

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अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख ने कहा है कि बिन लादेन के ख़िलाफ़ होनेवाली कार्रवाई के बारे में पाकिस्तान को पहले से इसलिए नहीं बताया गया क्योंकि अमरीका को डर था कि ख़बर ओसामा को लीक कर दी जाएगी.

सीआईए प्रमुख लियोन पनेटा ने टाइम मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें डर था कि “साझा कार्रवाई पूरे अभियान को चौपट कर देगी”.

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने कहा है कि बिन लादेन के ऐबटाबाद ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण वो शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं.

बिन लादेन की मौत के बाद सीआईए प्रमुख के साथ सबसे पहले इंटरव्यू का दावा करते हुए टाइम मैगज़ीन ने लिखा है, “सीआईए ने पहले से ही अपने दक्षिण एशियाई साझेदार के साथ मिलकर कार्रवाई नहीं करने का फ़ैसला कर लिया था.”

पनेटा के हवाले से पत्रिका ने लिखा है, “ये तय हुआ था कि पाकिस्तानियों के साथ काम करने की कोई कोशिश पूरे अभियान को चौपट कर देगी. वो हमारे लक्ष्य को पहले से सावधान कर दे सकते थे.”

तनाव

Image caption पनेटा को डर था कि साझा कार्रवाई अभियान को चौपट कर देगी.

पाकिस्तान को पिछले साल अमरीका से 1.3 अरब डॉलर की अमरीकी मदद मिली थी और पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में नेटो अभियान के लिए सामरिक सहयोग देता है.

लेकिन पिछले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है क्योंकि अमरीका का आरोप है कि पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में चरमपंथियों की मदद कर रहा है. वहीं पाकिस्तान अमरीकी ड्रोन हमलों को लेकर कई बार नाराज़गी ज़ाहिर कर चुका है.

इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आईएसआई का बचाव किया है.

एक बयान में उन्होंने कहा है, “जहां तक ऐबटाबाद स्थित ठिकाने की बात है, आईएसआई 2009 से ही सीआईए और अन्य सहयोगी ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहा था.”

उनका कहना था कि इस अभियान के लिए पाकिस्तानी सीमा के अंदर किसी भी फ़ौजी अड्डे का इस्तेमाल नहीं किया गया.

ज़रदारी

इसके पहले अमरीका के प्रतिष्ठित अख़बार दी वाशिंगटन पोस्ट में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने एक लेख लिखा है कि “बिन लादेन उस जगह के आसपास भी नहीं थे जहां हमारा अनुमान था कि वो होंगे.”

लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि इस अभियान से ये नहीं साबित होता कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ नाकाम हो रहा है.

इस बीच ओबामा प्रशासन अभी भी विचार कर रहा है कि ओसामा बिन लादेन के शव की तस्वीरों को जारी किया जाए या नहीं.

वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो बिन लादेन के मारे जाने का सबूत देखना चाहते हैं लेकिन व्हाइट हाउस को चिंता है कि इन तस्वीरों और वीडियो पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया होगी.

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