एयर इंडिया पायलटों को झटका

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Image caption एयर इंडिया ने पायलटों की हड़ताल से निपटने के लिए इंतज़ाम किए

पायलटों की हड़ताल से निपटने के लिए एयर इंडिया ने 18 चार्टर्ड उड़ानों की सेवाएं ली हैं.

इनमें से 16 घरेलू उड़ानों और दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए हैं.

ये विमान 'किंगफ़िशर एयरलाइंस' और 'एयर अरेबिया' से लिए गए हैं.

एयर इंडिया के लगभग 12,000 यात्रियों का अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एअरलाइंस में इंतज़ाम किया गया है.

एयर इंडिया का कहना है कि वो पट्टे पर दूसरे विमानों की सेवाएं लेने की भी सोच रही है जिसके लिए पांच मई को अखबारों में इश्तेहार दिए जाएंगे.

कंपनी के मुताबिक़ सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, खाड़ी के देशों में सेवाएं और अन्य स्थानीय उड़ानें शत प्रतिशत सामान्य रूप से चल रही हैं.

इसके अलावा एयर इंडिया ने परेशान यात्रियों की मदद के लिए उन्हे होटल की सुविधा देने की भी बात कही है.

स्थिति अस्पष्ट

एयर इंडिया के पायलटों की आठ दिनों से चल रही हड़ताल को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.

कल पायलटों की यूनियन आईसीपीए ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की थी.

आईसीपीए से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि हालांकि पर्दे के पीछे दोनो पक्षों के बीच बातचीत चल रही है लेकिन अभी समझौते का कोई फ़ॉर्मूला निकलकर नहीं आया है.

पायलटों के अनुसार उन्हे मैनेजमेंट की ओर से ये वादा चाहिए कि एक निश्चित अवधि के अंदर उन्हे एयर इंडिया के साथियों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जाएंगी.

वो ये मांग भी कर रहे हैं कि पायलटों के ख़िलाफ़ सभी कार्रवाइयां वापस ली जाएं.

प्रधानमंत्री से शिकायत

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में पायलटों की यूनियन ने एयर इंडिया प्रमुख अरविंद जाधव पर गंभीर आरोप लगाए थे.

पत्र के अनुसार जाधव एयर इंडिया को कथित तौर पर लूट रहे हैं, कर्मचारियों को अलग-थलग कर रहे हैं, उनके वेतन में देरी की जा रही है और कम्पनी को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं.

पत्र में पुराने आरोपों को दोहराया गया है जिनमें निजी एयरलाइनों को फ़ायदा पहुंचाना और महंगे विमान खरीदने की बात शामिल है.

अरविंद जाधव पर कथित तौर पर भ्रष्टाचारियों को बचाने और उन्हे संरक्षण देने का आरोप लगाया है और पूछा गया है कि सरकार ऐसे लोगों को कैसे बरदाश्त कर रही है.

उधर एयर इंडिया पर भी इस हड़ताल की वजह से भारी दबाव है और उसे करोड़ों का नुकसान हो रहा है.

घरेलू उड़ानें मात्र दस प्रतिशत तक सिमट गई हैं और प्रशासन का काम देख रहे पायलटों को जहाज़ उड़ाने के लिए बुलाना पड़ा है.

ये हड़ताली पायलट इंडियन कमर्शियल पायलेट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) के सदस्य हैं.

वर्ष 2007 में इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया के साथ हुए विलय से पहले ये पायलट इंडियन एयरलाइंस के कर्मचारी थे.

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