हमास-फ़तह में समझौता

हमास और फ़तह इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption दोनों गुटों के बीच समझौते से नए रास्ते खुलने की उम्मीद है

फ़लस्तीनी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण धड़ों यानी फ़तह और हमास के बीच चार वर्षों से चली आ रही असहमतियाँ खत्म हो गई हैं और दोनों पक्षों के नेताओं ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस सहमति पत्र पर फ़तह के महमूद अब्बास और हमास की तरफ से ख़ालिद मेशाल ने हस्ताक्षर किए हैं. दोनों गुटों के बीच मतभेद के चलते इन दोनों नेताओं की मुलाक़ात वर्ष 2007 के बाद नहीं हुई थी.

फ़लस्तीन के राष्ट्रपति और फ़तह पार्टी के अध्यक्ष महमूद अब्बास ने कहा कि फ़लस्तीनियों ने ‘मतभेद के काले पन्नों को हमेशा के लिए पलटने का फ़ैसला किया है.’

उनका कहना था, “जब तक हम दोनों गुट एकजुट है, हमारी सफलता निश्चित है. इस संधि ने फ़लस्तीनी इलाक़े में शांति का रास्ता साफ़ कर दिया है.”

साथ ही उन्होंने कहा कि अब इसराइल को शांति और यहूदी बस्तियों के बीच एक विकल्प चुनना होगा.

हमास नेता ख़ालिद मेशाल का कहना था कि इस संधि का मक़सद पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी पर एक स्वायत्त फ़लस्तीनी राज्य बनना है.

उन्होंने दोनों पक्षों को एक नई शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा, “आइए अब हम एक नई शुरुआत करें. हमने अल्लाह के लिए और अपनी आवाम के लोगों के लिए ये मुकाम पाने के लिए भरपूर प्रयत्न किया. ये हमने उन शहीदों के लिए किया, जिन्होंने फ़लस्तीन को आज़ाद करवाने के लिए अपनी जान गंवा दी.”

एक साल पहले हुए चुनाव में गज़ा के इलाक़ों में हमास की अभूतपूर्व जीत के बाद फ़तह को वहां से हटा दिया गया था.

इस समझौते से अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले एक अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ़ हो जाएगा. हाल फ़िलहाल के दिनों में अरब देशों में चल रही उथल-पुथल ने इस समझौते में एक नई ऊर्जा फूंकी है.

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, हमास को किसी भी तरह की मज़बूती देने के विरोध में थे लेकिन मिस्र की नई सरकार ने इस इस्लामी गुट के प्रति कम कठोर रवैया अपनाया है.

सवांददाताओं का कहना है कि ये इस बात की निशानदेही है कि अरब दुनिया में हो रहे राजनीतिक बदलाव इसराइल और फ़लस्तीनी संघर्ष के तानेबाने को बदल सकते हैं.

गंभीर मतभेद

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption हमास नेता ख़ालिद मेशाल ने इस संधि को शहीदों के नाम किया.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड के अनुसार जब दो विरोधी गुटों के फ़लस्तीनी नेता काहिरा में इस दोस्ती के मसौदे पर हस्ताक्षर किया तो उनके साथ लाखों अरब नागरिकों की आशा भी जुड़ी हुई है कि शायद ये क़दम लंबे अरसे से चले आ रहे आपसी झगड़े को ख़त्म कर दे जिसने फ़लस्तीनी मुद्दों को धक्का पहुँचाया है.

इस समझौते के बाद पहला क़दम होगा विशेषज्ञों का एक गुट बनाना जिसका काम होगा दोस्ती के मसौदे पर काम करना और साथ ही नए चुनावों की तैयारी करना.

हमास और फ़तह के प्रमुख सदस्य इस सरकार से फ़िलहाल बाहर रहेंगे.

लेकिन अभी भी कई अनसुलझे विवादों को सुलझाना बाक़ी है.

इसमें ये भी शामिल है कि क्या इसरायल के साथ बातचीत होनी चाहिए और ये भी कि ग़ज़ा और पश्चिमी तट पर सुरक्षा के इंतज़ामों को कैसे आपस में बाँटा जाए.

उधर हमास और फ़तह के बीच दोस्ती के इस क़दम से इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू नाराज़ हैं.

उन्होंने कहा है कि फ़लस्तीनी प्रशासन ये तय करे कि वो या तो इसराइल के साथ दोस्ती करेगा या हमास के साथ.

मतभेद

फ़तह का बोलबाला पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में है और हमास का राज ग़जा में चलता है.

इन दोनों के बीच कम से कम चार सालों से मतभेद हैं.

इस बीच ये साफ़ नही है कि इस समझौते से बनी नई सरकार से पश्चिमी देश से संबंध रखेंगे या नहीं.

चार मधयस्थ- अमरीका, यूरोपीय संगठन, सयुंक्त राष्ट्र और रूस ने लंबे अरसे से कह रहे हैं कि हमास हिंसा छोड़ दे और इसरायल की मौजूदगी को मान्यता दे.

हाल के महीनो में, क्षेत्र में जहां प्रजातंत्र की मांग हो रही है वहीं हज़ारों फ़लस्तीनी, ग़ज़ा और पश्चिमी तट की सड़कों पर उतर राजनीतिक एकता की मांग करते रहे हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि हालांकि ये प्रदर्शन उस स्तर के नहीं थे जैसा कि दूसरे देशों में देखा गया लेकिन इन प्रदर्शनों ने फ़लस्तीनी राजनेताओं का ध्यान ज़रूर आकर्षित किया है.

संबंधित समाचार