इतिहास के पन्नों से

इरानी
Image caption एसएएस कमांडो यूनिट ने कार्रवाई में पांच ईरानी बंदूकधारियों को मार दिया था

इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो पांच मई का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बहुत अहम है. इस दिन की कुछ प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं...

1980: लंदन में ईरानी दूतावास पर कब्ज़ा ख़त्म हुआ

आज के दिन लंदन में स्थित ईरानी दूतावास को कुछ हमलावरों से आज़ाद कराया गया था.

ब्रिटेन की एसएएस कमांडो यूनिट ने इस कार्रवाई में पांच ईरानी बंदूकधारियों को मार दिया जबकि एक को हिरासत में ले लिया गया था.

ईरानी दूतावास को पांच दिन तक चले कब्ज़े के बाद मुक्त कराया गया.

छह बंदूकधारियों ने पांच दिन पहले लंदन के केनसिंग्टन इलाक़े में स्थित ईरानी दूतावास पर कब्ज़ा कर लिया था और कई लोग बंधक बना लिए गए थे.

बंधक बनाए गए लोगों में ईरानी नागरिकों के अलावा बीबीसी के कुछ कर्मचारी भी थे जो दूतावास में अपने वीज़ा के सिलसिले में गए हुए थे.

इसी दिन एसएएस सुरक्षाकर्मियों की टीम ने दूतावास पर हमला किया और क़रीब पंद्रह मिनट तक चली कार्रवाई के बाद 19 बंधकों को रिहा करा लिया गया. गोलीबारी के दौरान एक बंधक की मौत हो गई और दो घायल भी हुए थे.

ईरानी दूतावास पर कब्ज़ा करने वाले बंदूकधारियों ने ईरान में बनाए गए 91 राजनीतिक बंधकों की रिहाई की मांग की थी.

1961:पहले अमरीकी अंतरिक्ष यात्री बने शेपर्ड

आज ही के दिन कमांडर ऐलन शेपर्ड अटलांटिक महासागर में अपने अंतरिक्ष यान से उतरे थे.

शेपर्ड अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमरीकी यात्री बने. इससे तीन हफ़्ते पहले रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गैगरिन अंतरिक्ष में जाने वाले पहले यात्री बने थे.

इसी दिन सुबह-सुबह अमरीकी नौ सेना के कर्नल शेपर्ड ने फ़्लोरिडा स्पेस स्टेशन से उड़ान भरी थी.

उड़ान भरने के बाद शेपर्ड अंतरिक्ष में 115 मील की दूरी तक गए और करीब पंद्रह मिनट बाद अटलांटिक महासागर में वापस लौटे.

जब एक हेलिकॉप्टर ने उन्हें अटलांटिक महासागर में से निकाला तो कर्नल शेपर्ड के पहले शब्द थे, "वाह, क्या सैर रही".

2005: टोनी ब्लेयर तीसरी बार प्रधानमंत्री बने

आज ही के दिन ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेता टोनी ब्लेयर तीसरी बार प्रधानमंत्री बने.

हालांकि इस ऐतिहासिक जीत के दौरान टोनी ब्लेयर की पार्टी को मिले मतों के औसत में कमी दर्ज की गई.

जीत के बाद टोनी ब्लेयर ने कहा था कि वे इस नतीजे की संजीदगी और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अपना तीसरा कार्यकाल शुरू करेंगे.

उधर विपक्षी दल कंज़रवेटिव पार्टी ने इन चुनावों में सत्ताधारी लेबर पार्टी के वोट बैंक में ख़ासी घुसपैठ की.

हालांकि वोटों में उनका औसत 2001 में आए चुनाव नतीजों के ईर्द-गिर्द ही रहा था.

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