'हिरासत में लिए लोगों की प्रताड़ना'

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Image caption सीरिया में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं

सीरिया से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षाबलों ने कई जगहों से हज़ारों लोगों को हिरासत में ले लिया है.एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है.अमरीका ने इसे बर्बर बताया है.

माना जा रहा है कि मार्च के मध्य से सीरिया में शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों में पाँच सौ से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक दरा शहर में गोलीबारी और लोगों को पकड़े जाने की ख़बरें हैं. ये वही शहर है जहाँ मार्च में सबसे पहले विरोध प्रदर्शन शुरु हुए थे और अब भी ये शहर विद्रोह का केंद्र बना हुआ है.

वहीं सीरियाई अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें हथियार मिले हैं जिन्हें भूमिगत रखा गया था. अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने ‘हथियारबंद आंतकी गुटों’ के ऐसे लोगों को पकड़ा है जो प्रदर्शनों के पीछे हैं.

दरा में कई घरों पर छापे मारे गए और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया. सीरिया के अन्य इलाक़ों से भी लोगों को घरों से या प्रदर्शन करते समय पकड़ा गया है.

'दुश्मनों की साज़िश'

सीरिया में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिरासत में लिए जाने वालों की संख्या हज़ारों में है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि पकड़े गए लोगों को मारा-पीटा गया है.अमरीका ने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को सामूहिक सज़ा का बर्बर रूप बताया है.

कार्यकर्ताओं ने अपील की है कि लोग शुक्रवार को सीरिया भर में विरोध प्रदर्शन करें.

सीरिया में स्वतंत्र रूप से जाकर रिपोर्टिंग की आज़ादी नहीं है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस वजह से प्रशासन ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहा है मानो ये पूरा संकट सीरिया के दुश्मनों की साज़िश है.

विद्रोह शुरु होने के शुरुआती दौर में कुछ इलाक़ों में लोगों की वैध माँगों को कम से कम सुना जा रहा था पर संवाददाता का कहना है कि अब तो वो भी नहीं हो रहा.

सरकारी मीडिया मारे गए सैनिकों और पुलिसकर्मियों के अंतिम संस्कार को काफ़ी कवरेज दे रहा है और उन्हें ऐसे शहीदों की संज्ञा दी जा रही है जो अपने देश के लिए मारे गए.

सरकारी मीडिया ऐसे लोगों के इक़बालिया बयान भी दिखा रहा है जिसे प्रशासन ‘हथियारबंद आतंकवादी गुटों’ का सदस्य बता रहा है.

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