'लीबिया में संघर्ष विराम हो'

संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी प्रमुख वलेरी एमोस इमेज कॉपीरइट AFP

सयुंक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी यूएनएड की प्रमुख वलेरी एमोस ने लीबिया में तुंरत कार्यवाई रोकने की अपील की है ताकि मानवीय सकंट की भयंकर स्थिति से निपटा जा सके.

बैरोनेस एमोस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को कहा कि पश्चिमी लीबिया में मिस्राता एक मात्र शहर है जो कि विद्रोहियों के क़ब्ज़े में है और वहां खाने-पीने की भंयकर किल्लत है.

कर्नल ग़द्दाफ़ी के ख़िलाफ़ शुरू हुए अभियान के बाद अब तक लगभग साढे सात लाख लोग लीबिया से भाग चुके है.

इस बीच मिस्राता में विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी सेना को शहर की सीमा से दूर खदेड़ दिया है.

मिस्राता को पिछले दो महीनों से सरकारी सेना ने घेर रखा है.

उधर त्रिपोली में रात भर गोली बारूद की आवाज़ सुनाई दे रही थी. ये हमले नेटो द्वारा किए गए हमले बताए गए हैं.

प्रत्यक्षदर्शिंयों ने कम से कम पांच हवाई हमले की बात कही है और समझा जा रहा है कि ये हमले कर्नल ग़द्दाफ़ी के अहाते और दूसरे सरकारी इमारतों को निशाना बना कर किया जा रहा था.

लीबिया की सरकार ने अब तक इस बाबत कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.

पिछले सप्ताह त्रिपोली बंदरगाह से एक नाव, जिसमें 600 शरणार्थी सवार थे, वो रास्ता भटक कर गुम हो गई है.

ये अभी तक साफ़ नहीं है कि उसमें सवार कितने लोगों की मौत हो गई लेकिन प्रत्यक्षदर्शीयों के मुताबिक़ कई लाशें तैर रही थीं और कुछ जो बच गए वे तैर कर किनारे तक पहुंचे थे.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने भू-मध्यसागर का इस्तेमाल कर रहे सभी जहाज़ों को आग्रह किया है कि वे उन सभी नावों की मदद के लिए तैयार रहें जो दरअसल समुद्र में चलने के लायक नहीं होती हैं लेकिन इन दिनों कई शर्णार्थियों को सवार कर लीबिया से यूरोप पंहुचाने का काम कर रही हैं.

इस समुद्र में कम से कम तीन और नावों के गुम होने की ख़बर है.

बैरोनेस एमोस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस बात को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि हर धड़ा अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करे और क्लसटर बम, समुद्र और जमीनी बारूद के साथ साथ हवाई हमले का इस्तेमाल न करें क्योंकि ये हर तरह से आम लोगों के अधिकारों के प्रति अंसवेदनशील रवैया दर्शाता है.

उनका कहना था, “खाने पीने की भयंकर कमी देश को हर तरह से निष्क्रिय बना रही है और आने वाले दिनों में ही इसके प्रभाव का अंदाज़ा होगा. इससे सबसे ज़्यादा सबसे ग़रीब तबक़ा ही प्रभावित होगा.”

उनका कहना है कि खाने पीने की वस्तुएं केवल कुछ महीनों के लिए उपलब्ध हैं. उन्होंने साथ ही और अधिक आर्थिक मदद की गुहार की है.

विरोधियों का कहना है कि मिस्राता अभी भी घिरा हुआ है लेकिन उनका दावा है कि पश्चिम की तरफ़ तीस किलोमीटर आगे तक उन्होंने अपना क़ब्ज़ा बना लिया है.

मिस्राता में एक विद्रोही गुट के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, “हमने ग़द्दाफ़ी को मिस्राता से धकेल दिया है ”

उनका कहना था कि विद्रोहियों का मनोबल काफ़ी मज़बूत है और वे अपना संघर्ष जारी रखना चाहते हैं.

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