सीरियाई सेना नए इलाक़े में

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Image caption सीरियाई नागरिक और अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं

दमिश्क़ से आ रही ख़बरों के अनुसार बुधवार की रात सीरियाई सेना दमिश्क़ के बाहरी इलाक़े सक़बा में दाख़िल हो चुकी है और कई गिरफ्तारियां भी की जा रही हैं.

सक़बा में पिछले सप्ताह सत्ता विरोधी बड़े प्रदर्शन हुए थे.

सेना की टुकड़ियां टैंकों के साथ कई और जगहों पर भेजी गई हैं जहां पिछले दिनों प्रदर्शन हुए हैं.

इस बीच होम्स और हमा शहरों में सरकार विरोधी कई ताज़ा प्रदर्शन के समाचार हैं. सात सप्ताह पहले शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन में अब तक पांच सौ से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

हाल फ़िलहाल में कम से कम 2,500 लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में गिरफ़्तार किया गया है हालांकि मानावाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि संख्या और भी अधिक हो सकती है.

देश में किसी भी विदेशी पत्रकारों को आने की अनुमति नहीं है इसीलिए ख़बरों की पुष्टि करना भी आसान नहीं है.

गत 15 मार्च को शुरू हुए ये प्रदर्शन चार दशकों से इस देश पर राज कर रहे असद परिवार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है.

'शुक्रवार की ललकार'

लेबनान की राजधानी बेरूत से बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर के अनुसार सरकार ये सुनिश्चित करना चाहती है कि शुक्रवार को नमाज़ के बाद कोई बड़ा प्रदर्शन न हो.

ख़बर है कि उपनगर सक़बा के अलावा सेना और टैंक कई दूसरे शहरों में भी भेजे गए है.

बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार सरकार की कड़ी कार्रवाई के बावजूद राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन ख़त्म नहीं हो रहे हैं.

आम लोगों ने इस शुक्रवार को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बाहर निकलने के लिए अभियान को “शुक्रवार की ललकार” की संज्ञा दी है.

इंटरनेट पर जारी किए गए अपुष्ट वीडियो फ़ुटेज में दमिश्क़ के उत्तर में हमा शहर की सड़कों पर रात में सैंकड़ों लोग मार्च करते दिखाए गए हैं.

"सत्ता भ्रष्ट है" जैसे नारे शहर में गूंज रहे हैं.

सयुंक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने राष्ट्रपति अल असद से प्रदर्शनाकारियों पर सरकार की कार्रवाई को ख़त्म करने की अपील की है.

अमरीका ने इन कार्रवाइयों को बर्बर बताया था और सीरियाई अधिकारियों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं.

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