मिस्र में विद्रोहियों की बैठक

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Image caption काहिरा के तहरीर चौराहे पर मुबारक़ के विरोध में हज़ारों लोगों ने आंदोलन किया था

मिस्र में पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ हुए विद्रोह में हिस्सा लेनेवाले समूहों के दो हज़ार से अधिक देश के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा के लिए बैठक कर रहे हैं.

फ़रवरी में मुबारक के हटने के सत्ता से हटने के बाद ये ऐसी पहली बैठक है.

इसमें सितंबर में होनेवाले चुनाव की रणनीति बनाए जाने पर विचार होना है.

मिस्र में जनवरी के अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में लोगों ने मुबारक़ से सत्ता छोड़ने की माँग के लिए जन-आंदोलन शुरू किया था.

मुबारक के गद्दी छोड़ने के बाद मिस्र का शासन एक गोपनीय सैन्य परिषद चला रही है.

काहिरा के तहरीर चौक पर जुटे आंदोलनकारियों की मिस्र के आगामी राजनीतिक स्वरूप के निर्माण में बहुत कम भागीदारी है.

मगर अब पहली बार ये समूह - लोकतांत्रिक शक्तियों की राष्ट्रीय परिषद – की बैठक कर ये आशा कर रहे हैं कि विद्रोह से जन्मी परिवर्तन की लहर को जारी रखा जाए.

चिंता

Image caption मिस्र में होस्नी मुबारक की पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया है

आंदोलनकारियों कहना है कि उन्हें इस बात की भारी चिंता है कि मुस्लिम ब्रदरहुड सितंबर में हुए चुनाव में भारी पड़ सकता है.

उनके अनुसार ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि मुबारक की बदनाम हो चुकी पार्टी का स्थान लेने के लिए अब तक कोई वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष पार्टी गठित नहीं की जा सकी है.

मुबारक की पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

इससे पहले भी मिस्र में धर्मनिरपेक्ष समूहों को एक करने की कोशिशें हुईं मगर उन्हें बहुत सफलता नहीं मिल पाई.

प्रेक्षकों की राय है कि आंदोलनकारियों के पास अनुभव की कमी है और कई लोग दलगत राजनीति से दूर ही रहना चाहते हैं.

ऐसी स्थिति में काहिरा में आंदोलनकारियों का एक दिन का सम्मेलन हो अवश्य रहा है लेकिन चुनाव के मात्र पाँच महीने दूर होने को देखते हुए एक नई राजनीतिक शक्ति को खड़ा करने के लिए समय बेहद कम रह गया है.

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