जबरन विवाहों पर रोक लगे: ब्रितानी सांसद

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Image caption वर्ष 2008 में हर हफ़्ते तीन लड़कियों को पाकिस्तान से वापस लाया जा रहा था

ब्रिटेन के साँसदों ने जबरन विवाहों पर रोक लगाने के लिए कड़े नियमों की माँग की है. पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन में दक्षिण एशियाई मूल के परिवारों से संबंधित इस तरह के कई मामले सामने आए हैं.

हाउस ऑफ़ कॉमंस की होम अफ़ेयर्स कमेटी का कहना है कि वर्तमान क़ानून प्रभावशाली नहीं हैं. इनके तहत दोषी व्यक्तियों को दो साल के लिए जेल भेजा जा सकता है.

जबरन विवाह के बारे में चिंता 2008 में तब बढ़ी जब ब्रितानी प्रशासन ने ख़ुलासा किया कि वह हर सप्ताह तीन लड़कियों को पाकिस्तान से वापस ला रहे थे.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि हालात इससे भी ज़्यादा ख़राब हैं क्योंकि बहुत से मामले सामने आ ही नहीं पाते हैं.

नस्लवाद के आरोपों का डर

ब्रिटेन में स्कूल भी इस समस्या से इस डर से जूझ नहीं पा रहे हैं कि कहीं उन पर नस्लवादी होने का आरोप न लगा दिया जाए.

इससे प्रेरित होकर संसद ने समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए इंग्लैंड,वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में नए क़ानून बनाने का फ़ैसला किया.

अब हाउस ऑफ़ कॉमंस की होम अफ़ेयर्स कमेटी का तर्क है कि जबरन विवाहों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का समय आ गया है.

साँसदों का मानना है कि इससे देश और विदेश में एक कड़ा संदेश जाएगा.

कमेटी ने स्कूलों की भी उन मामलों में हस्तक्षेप न कर पाने के लिए आलोचना की है जहाँ लड़कियाँ और कभी कभी लड़के भी बिना वजह कक्षा से ग़ायब हो गए थे.

उनका कहना है कि अध्यापकों को अभी भी इस बात की चिंता है कि अगर वह इन मामलें को दक्षिण एशियाई परिवारों के सामने उठाते हैं तो उन पर नस्लवाद का आरोप लगाया जा सकता है.

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