'पाकिस्तान और ड्रोन हमले चाहता था'

Image caption कियानी ने अमरीका से दक्षिण वजीरिस्तान में ड्रोन हमले जारी रखने का अनुरोध किया था

पाकिस्तान के डॉन अख़बार ने विकीलीकेस के हवाले से अमरीकी सरकार के गुप्त केबिल्स प्रकाशित किए हैं जिनके अनुसार पाकिस्तानी सेना के चोटी के अधिकारी वहाँ पर अमरीकी ड्रोन हमलों का समर्थन करते रहे हैं. हाँलाकि सार्वजनिक रूप से वह इसका विरोध करते हैं.

वास्तव में जनवरी 2008 तक पाकिस्तान के सैनिक अधिकारी अपने सैनिक अभियानों के लिए अमरीकी ड्रोन समर्थन का अनुरोध करते रहे हैं.

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख अशफ़ाक कियानी ने 22 जनवरी 2008 को अमरीकी कमाँडर एडमिरल विलियम फ़ालन के साथ बैठक में 'पाकिस्तान के संघर्ष वाले इलाक़े दक्षिण वज़ीरिस्तान में अमरीका के ड्रोन हमलों का समर्थन जारी रखने' का अनुरोध किया था.

पाकिस्तानी सेना ने खंडन किया

उधर पाकिस्तानी सेना ने उन ख़बरों का खंडन किया है जिनमें आरोप लगाए गए हैं कि सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने क़बायली इलाक़ों में जारी अमरीकी ड्रोन हमलों का समर्थन किया था.

सेना की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने कभी भी ड्रोन हमलों का समर्थन नहीं किया और न ही चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में अमरीका से मदद ली.

बयान के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अमरीकी मदद बिना स्वात और दक्षिण वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सफल अभियान किया.

दुख है, इतने संसाधन नहीं हैं: अमरीका

हालाँकि जनरल कियानी के अनुरोध के बारे में यह नहीं स्पष्ट हो पाया है कि यह अनुरोध सिर्फ़ हवाई निगरानी के लिए किया गया था या फिर मिसाइलों से लैस ड्रोनों की माँग की गई थी.

इस बैठक की जो रिपोर्ट अमरीकी राजदूत पैटरसन ने वाशिंगटन भेजी थी, उसके अनुसार एडमिरल फ़ालन ने 'इस बात पर दुख प्रकट किया कि उनके पास इस अनुरोध को पूरा करने के साधन नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस बात की पेशकश ज़रूर की कि प्रशिक्षित अमरीकी मरीन सैनिक पाकिस्तानी सेना के साथ हवाई हमलों का समन्वय कर सकते हैं.'

एक और केबिल में जिसकी तारीख़ 26 मई 2009 दी गई है,पाकिस्तानी राष्ट्रपति ज़रदारी की एक अमरीकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात का ब्योरा है जिसमें वह हाल के ड्रोन हमले का ज़िक्र कर रहे हैं जिसमें साठ लोग मारे गए थे.

राजदूत पैटरसन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा - "ज़रदारी ने बताया कि उनके सैनिक सलाहकार मानते हैं कि अगर पाकिस्तानी सैनिकों ने यह हमला अकेले किया होता तो इस हमले में उनके साठ से ज़्यादा लोग मारे जाते."

पाकिस्तान का सैनिक और असैनिक नेतृत्व ड्रोन हमलों के पक्ष में है इसका सबूत इस बात से मिलता है कि वह लगातार इस बात की माँग करते रहे हैं कि ड्रोन तकनीक को उन्हें उपलब्ध कराया जाए.

उन्होंने अमरीका से कहा कि मुद्दा ड्रोन के सही निशाने का नहीं है बल्कि इस बात का है कि इस बारे में लोगों की भावनाओं को किस तरह नियंत्रित किया जाए.

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