'अगला गूगल भारत या चीन में न बने'

बराक ओबामा इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption ओबामा चाहते हैं कि ग़ैरक़ानूनी ढंग से रह रहे अप्रवासी अर्थव्यवस्ता की मुख्यधारा में शामिल हों

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अप्रवासन संबंधी अमरीकी क़ानूनों पर व्यापक पुनर्विचार करने का आहवान किया है.

उन्होंने कहा है कि यदि ग़ैरक़ानूनी ढंग से देश में रह रहे अप्रवासियों को अवैध अर्थव्यवस्था से निकालकर मुख्यधारा में शामिल किया जाए तो पूरे देश को इसका फ़ायदा होगा.

इंटेल, गूगल और याहू का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनके संस्थापक अप्रवासी थे और वे नहीं चाहते कि अगली इंटेल, गूगल या याहू भारत या चीन में पैदा हो, इसलिए अप्रवासन सही ही नहीं बल्कि चतुर क़दम भी है.

अनुमान है कि अमरीका में इस तरह से रह रहे लगभग 1.1 करोड़ अप्रवासी हैं.

'इंटेल, गूगल, याहू के संस्थापक कौन थे?'

टेक्सास प्रांत के एल पासो में उन्होंने कहा, "सबसे पहली बात तो यह है कि ये सरकार की विशेष ज़िम्मेदारी है कि वह क़ानून का पालन करे और सीमाओं को सुरक्षित बनाए. दूसरा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए यदि वे दस्तावेज़ों के बिना मज़दूरों को काम देते हैं और उनका शोषण करते हैं."

ओबामा का ये भी कहना था, "जो लोग यहाँ पर ग़ैरक़ानूनी ढंग से रह रहे हैं उनकी भी ज़िम्मेदारी है. उन्होंने क़ानून का उल्लंघन किया है. उन्हें जुर्माना भरना होगा, कर देना होगा, अंग्रेज़ी सीखनी होगी. उन्होंने अपने बारे में पूरानी जानकारी देनी होगी और इससे पहले की वे क़ानूनी तौर पर यहाँ रह सकें, उन्हें एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा. लेकिन ऐसा करने के लिए कहना कोई नाजायज़ मांग तो नहीं है."

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है कि पुराने हो चुकी क़ानूनी अप्रवासन प्रक्रिया में सुधार करने होंगे.

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अप्रवासन से अमरीका को फ़ायदा हुआ है.

ओबामा ने कहा, "आप इंटेल, गूगल, याहू, ई-बे को देखिए. ये सभी महत्वपूर्ण अमरीकी कंपनियाँ हैं. क्या आपको पता है कि इन सभी कंपनियों के संस्थापक कौन थे - अप्रवासी. हम नहीं चाहते कि अगली इंटेल या अगली गूगल कंपनी चीन या भारत में बने. हम चाहते हैं कि वो कंपनियाँ और नौकरियाँ यहाँ पर पैदा हों. इसलिए अप्रवासन की नीति केवल सही क़दम ही नहीं है बल्कि यह एक चतुर क़दम भी है."

संबंधित समाचार