हज़ारों यहूदियों को मारने के लिए दोषी

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Image caption 91 साल के देमयानयुक यूक्रेन में पैदा हुए थे.

जर्मनी की एक अदालत ने जॉन देमयानयुक को दूसरे विश्व युद्ध के एक नाज़ी यातना शिविर में करीब 28,000 यहूदियों को मारने में मदद करने के लिए दोषी पाया है.

देमयानयुक को पांच साल की सज़ा सुनाई गई है.

अभियोजन पक्ष के वकीलों के मुताबिक साल 1943 में देमयानयुक पोलैंड के सोबीबूअर यातना शिविर में पहरेदार का काम करते थे.

देमयानयुक ने इस आरोप से इनकार किया है और दावा किया है कि सोवियत संघ के नागरिक होने की वजह से वो भी उस शिविर की यातनाओं के भुक्तभोगी थे.

देमयानयुक के वकीलों ने कहा है कि वो अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

सोवियत संघ की सेना में थे देमयानयुक

सोवियत संघ की 'रेड आर्मी' में सैनिक, देमयानयुक को 1942 में जर्मनी ने गिरफ्तार कर लिया.

साल 1980 के दशक में उन्हें इसराइल की एक अदालत ने ट्रेबलींका के यातना शिविर के पहरेदार होने के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई और ‘ईवान द टेरिबल’ का नाम दिया.

लेकिन इस फैसले को बाद में बदल दिया गया और नए सबूतों के मुताबिक शायद इसके लिए कोई और यूक्रेनी शख्स ज़िम्मेदार था.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद देमयानयुक अमरीका में रहे जहां उन्होंने ओहायो के एक कार कारखाने में काम किया.

लेकिन वर्ष 2009 में अमरीका से जर्मनी प्रत्यर्पित होने के बाद से देमयानयुक हिरासत में रहे हैं.

ये अभी साफ नहीं है कि इससे उनकी सज़ा कम होगी या नहीं.

फैसले से संतुष्ट हैं पीड़ित

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Image caption देमयानयुक के परिवार के मुताबिक वो काफी बीमार हैं.

सोबीबूअर यातना शिविर में करीब ढाई लाख यहूदी मारे गए थे. उनमें से कई के रिश्तेदार इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे.

उन सभी ने इस फैसले पर संतोष ज़ाहिर किया.

अदालत में मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीफ़न इवान्स के मुताबिक, इनके लिए देमयानयुक की सज़ा से ज़्यादा ज़रूरी था.

ये इसलिए और अहम था क्योंकि ये अदालत म्यूनिख़ शहर में है और इसी शहर में नाज़ी पार्टी की नींव रखी गई थी.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाज़ियों के बनाए यातना शिविरों में लाखों लोगों की जान गई थी.

27 जनवरी 1945 को सोवियत सेना ने यहूदी क़ैदियों को रिहा करवाया था.

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