'चरमपंथी हमले की साज़िश का भंडाफोड़'

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Image caption न्यूयॉर्क की एंपायर स्टेट बिल्डिंग भी चरमपंथियों के निशाने पर थी

अमरीकी नेवी सील्स के हाथों ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पहली बार अमरीका में एक चरमपंथी हमले की साज़िश का भंडाफोड़ किया गया है.

न्यूयॉर्क पुलिस ने अफ़्रीक़ी मूल के दो लोगों को मैनहैटन में यहूदियों के धर्म स्थल एक सिनेगॉग पर हमले और यहूदियों को बंदूक़ो और हथगोलों से मारने का षडयंत्र रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.

पुलिस का कहना है कि इन कथित चरमपंथियों की न्यूयॉर्क के मशहूर पर्यटक स्थल एंपायर स्टेट बिल्डिंग पर भी हमला करने की योजना थी.

गिरफ़्तार लोगों में से एक अलजीरियाई मूल का 26 वर्षीय अहमद फ़रहानी है और दूसरा 20 वर्षीय मोहम्मद ममदूह मोरक्को मूल का अमरीकी नागरिक है.

यह दोंनो न्यूयॉर्क के क्वींस इलाक़े में रहते थे.

पुलिस के मुताबिक़ इन दोनों ने सादे भेष में काम करने वाले एक पुलिसवाले से ही तीन पिस्तौल और क़रीब 100 राउंड कारतूस के साथ साथ एक हथगोला भी ख़रीदा था. पुलिस इन दोनों पर क़रीब सात महीने से नज़र रखे हुए थी.

'साज़िश'

पुलिस कमिश्नर रेमंड केली कहते हैं, “कई महीनों पहले सादे भेष में पुलिस वाले के सामने फ़रहानी ने यहूदियों को मारने और उनके पूजा स्थल को उड़ाने की ख्वाहिश भी ज़ाहिर की थी. लेकिन इन लोगों का अल-क़ायदा संगंठन से कोई संबंध नहीं पाया गया है.”

इन दोनों पर आतंकवाद के साथ साथ अवैध हथियार रखने और लोगों के प्रति द्वेष और घृणा रखने संबंधी आरोप भी लगाए गए हैं.

Image caption न्यूयॉर्क में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि इन दोनों कथित चरमपंथियों ने यहूदियों के प्रति घृणा का इज़हार किया था और हमले की तैयारी में यहूदियों का भेष बनाकर उनके सिनेगॉग में पूजा करने के बहाने जाकर वहां यहूदियों को मारने और सिनेगॉग को तबाह करने की भी योजना बनाई थी.

मैनहैटन की आपराधिक अदालत में इन अभियुक्तों के वकील स्टीफ़न पोकार्ट ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने कोई जुर्म नहीं किया है.

लेकिन शहर के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा है कि सुरक्षा एजेंसियों के चुस्त रवैये और मुस्तैदी के कारण शहर में कई चरमपंथी हमलों को नाकाम बना दिया गया है.

ब्लूमबर्ग ने कहा “हमने हज़ारों बेहतरीन पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात किए हुए हैं, इसके अलावा चरमपंथ से निपटने के लिए आधुनिकतम तकनीक का भी प्रयोग किया जाता है जिससे इस प्रकार के हमलों को अंजाम दिए जाने से पहले ही रोका जा सके.”

सुरक्षा इंतज़ाम

वैसे भी वर्ष 2001 के 11 सितंबर के हमलों के बाद से ही न्यूयॉर्क में सुरक्षा हाई अलर्ट पर रहती है.

लेकिन बिन लादेन के मारे जाने के बाद उसके गुट अल-क़ायदा के ज़रिए अमरीकी शहरों पर हमलों का ख़तरा बढ़ जाने के कारण सुरक्षा और सख़्त कर दी गई है.

आम लोगों से भी चौकन्ना रहने की अपील की गई है और किसी भी संदिग्ध चीज़ या गतिविधि के बारे में पुलिस को तुरंत ख़बर करने को भी कहा जा रहा है.

भारतीय मूल के एक अमरीकी नागरिक मुबश्शिर कहते हैं, “हम सभी लोगों को ऐसे हमलों के लिए चौकन्ना रहने की तो ज़रूरत है ही, लेकिन इस तरह के हमलों का समय रहते ही पर्दाफ़ाश करने में शहर की पुलिस की मुस्तैदी काफ़ी मायने रखती है.”

ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उसके मकान से मिले कुछ दस्तावेज़ से अमरीकी अधिकारियों को यह भी पता चला है कि अब अल-क़ायदा का निशाना अमरीका की ट्रेंने भी हैं. और इसीलिए ख़ासकर न्यूयॉर्क में सभी रेल स्टेशनों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

इसी के साथ न्यूयॉर्क में ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद से चरमपंथी हमलों की 13वीं साज़िश का भंडाफोड़ किया गया है. जिनमें अधिकतर अमरीका में वैध रूप से रहने वाले विदेशी या अमरीकी नागरिक ही शामिल थे.

अब 17 मई को इन दोनों को फिर अदालत में पेश किया जाएगा और अगर इन पर आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.

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