ट्विटर पर आया तालिबान

Image caption तालिबान ने एक ज़माने में टीवी और रेडियो पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.

अफ़गानिस्तान में एक ज़माने में संगीत, टीवी और फ़िल्मों पर प्रतिबंध लगाने वाले तालिबान ने अब ट्विटर के ज़रिए लड़ाई छेड़ दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार तालिबान ने 12 मई को अपना पहला ट्वीट किया है वो भी अंग्रेज़ी में जिसमें उन्होंने ‘खाक ए शफीद में दुश्मनों पर हमले’ की बात कही है. इस ट्वीट में वेबसाइट का लिंक भी दिया गया है ताकि मामले की और जानकारी मिल सके.

अंग्रेज़ी में ट्विटर पर तालिबान का आना दर्शाता है कि गुफाओं और जंगलों में छुपकर रहने वाले लड़ाकू भी अपने प्रचार अभियान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने से परहेज़ नहीं कर रहे हैं.

1996 से लेकर 2001 तक जब अफ़गानिस्तान पर तालिबान का शासन था तो देश में सभी इलेक्ट्रानिक उत्पादों को गैर इस्लामी क़रार दे दिया गया था. जीवित लोगों के फोटोग्राफ से लेकर वीडियो प्लेयर तक रखना अपराध था जिसके लिए कोड़ों की सज़ा मिलती थी.

अब वो अमरीकी नेतृत्व वाले सैनिकों पर हमले के वीडियो, टेक्सट मैसेज और ईमेल भेजते हैं और वेबसाइट पर जानकारी भी देते हैं.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने एएफपी से कहा, ‘‘ इस्लामी देश अफ़गानिस्तान छह महीने पहले ट्विटर में शामिल हुआ है. हमने ऐसा किया क्योंकि ट्विटर पश्चिमी देशों में एक लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट है और हम अपनी आवाज़ उन्हें सुनाना चाहते हैं.’’

प्रवक्ता का कहना था कि पश्चिमी देशों में अफ़गानिस्तान के बारे में एकतरफा खबरें दी जाती हैं लेकिन अब इसके ज़रिए सच्चाई का पता चलेगा.

मुजाहिद ने कहा कि तालिबान का फेसबुक पन्ना कंपनी ने इस साल बंद कर दिया है लेकिन कई समर्थक अभी भी फेसबुक पर हमारी खबरें और अन्य जानकारी दे रहे हैं.

प्रवक्ता का कहना था, ‘‘ हम मानते हैं कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और इंटरनेट अल्लाह का वरदान है.’’ हालांकि मुजाहिद ने इस पर और अधिक बात करने से इंकार कर दिया.

तालिबान का ट्विटर अकाउंट @alermarahweb के नाम से है जिससे वो दिन भर में कई संदेश भेजते हैं जो मूलत पश्तो भाषा में होते हैं. इनके फॉलो करने वाले 4200 लोग हैं और यह संख्या अंग्रेज़ी ट्वीट के बाद बढ़ती जा रही है.

उल्लेखनीय है कि तालिबान का टि्वटर अकाउंट ब्रितानी चैरिटी संस्थाओं को भी फॉलो करता है.

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