इंग्लैंड की महारानी का ऐतिहासिक आयरलैंड दौरा

महारानी इलिज़ाबेथ (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption महारानी इलिज़ाबेथ का आयरलैंड दौरा दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दे सकता है.

इंग्लैंड की महारानी इलिज़ाबेथ मंगलवार से आयरलैंड के चार दिनों के ऐतिहासिक दौरे पर जा रहीं हैं.

ये ब्रिटेन के किसी भी सम्राट का आयरलैंड का पहला दौरा होगा. आयरलैंड पहले ब्रिटेन का ही हिस्सा था लेकिन आज से 90 वर्ष पहले 1921 में ब्रिटेन से अलग हुआ था.

इससे पहले सम्राट जॉर्ज पंचम ने 1911 में आयरलैंड का दौरा किया था जब वह ब्रिटेन का हिस्सा था.

महारानी इलिज़ाबेथ के इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिए मील का पत्थर समझा जा रहा हैं.

लेकिन उनका दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तरी आयरलैंड में हिंसक वारदातें बढ़ती जा रहीं हैं. उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन का एक विवादास्पद प्रांत है जिस पर आयरलैंड अपनी दावेदारी करता है.

कार्यक्रम

आयरलैंड की पुलिस ने महारानी के दौरे के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए हैं. आयरलैंड के एक गुट ने बम विस्फोट की धमकी दी है जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है.

लगभग चार हज़ार पुलिस बल तैनात किए गए हैं. आयरलैंड की राष्ट्रपति मेरी मैक्अलीस की दावत पर महारानी इलिज़ाबेथ वहां जा रही हैं.

राष्ट्रपति मेरी डबलीन के फ़िनिक्स पार्क स्थित अपने निवास स्थान पर महारानी का विधिवत रूप से स्वागत करेंगी.

Image caption जॉन मेजर ने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई.

चार दिनों की अपनी यात्रा के दौरान महारानी बहुत सारी जगहों पर जाएंगी जिनमें सबसे प्रमुख होगा क्रोक पार्क स्टेडियम और आईलैंडब्रिज स्थित नेशनल वार मेमोरियल गार्डेंस का दौरा.

1920 में क्रोक पार्क स्टेडियम में खेले जा रहे फ़ुटबॉल मैच के दौरान ब्रिटने की सेना ने गोलियां चला दी थीं जिनमें खिलाड़ियों समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई थी.

वार मेमोरियल उन लोगों की याद में बनाया गया है जिन्होंने आयरलैंड की आज़ादी के लिए ब्रिटेन की सेना से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी.

'ऐतिहासिक क़दम'

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने कहा है कि महारानी का दौरा दोनों देशों के बीच रिश्ते पर मुहर लगा देगी.

जॉन मेजर ने 90 के दशक में दोनो देशों के बीच शांति प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाई थी.

जॉन मेजर ने बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़नाईट से बातचीत के दौरान कहा, ''दोनों देशों के इतिहास को देखते हुए मेरा ख़्याल है कि महारानी के दौरे को बहुत बड़ी घटना के तौर पर देखा जाएगा और भविष्य में दोनों देश के संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए निश्चित तौर पर इसे एक निर्णायक क़दम कहा जाएगा.''

आयरलैंड के एक असंतुष्ट गुट के ज़रिए बम की धमकी के बारे में जॉन मेजर का कहना था, "आप कुछ लोगों को कहीं भी किसी भी चिज़ के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए देख सकते हैं, इसलिए मेरा मानना है कि मुठ्ठी भर लोग हो सकता है कि प्रदर्शन करें लेकिन वह आयरलैंड की जनता की बहुमत की राय नहीं हो सकती."

आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री बर्टी अहर्न ने भी महारानी के दौरे को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, ''महारानी का चार दिनों का दौरा आयरलैंड और ब्रिटेन के संबंधों की परिपक्वता को दर्शाता है.''

महारानी का दौरा का मक़सद ये बताना है कि दोनों देश अपने अतीत को भूलाकर आगे बढ़ गए हैं लेकिन इस दौरे से कुछ लोगों की भावना भी भड़क सकती है जिनका मानना है कि जब तक आयरलैंड विभाजित है उसे ब्रिटेन का स्वागत नहीं करना चाहिए.