दो साल बाद भी सवाल क़ायम

लंबे समय तक चला गृह युद्ध
Image caption तबाही का आलम

आधुनिक समय में सबसे लंबे अरसे तक चले युद्धों की जब बात चलती है, तो श्रीलंका का गृह युद्ध सबसे ख़ूनी और सबसे लंबी अवधि तक चली लड़ाई की सूची में काफ़ी ऊपर आता है. इस भीषण लड़ाई को ख़त्म हुए ठीक दो साल पूरे हो गए हैं.

तमिल विद्रोहियों और सरकार पर यु्द्ध अपराध के आरोप लगते रहे हैं. लड़ाई ख़त्म होने के बाद श्रीलंका के लोगों ने राहत की सांस ली है कि अब कोई युद्ध नहीं हो रहा है और जिन बमबारियों से पूरा देश दहल जाता था अब ऐसा नहीं हो रहा है.

प्रभाकरण के जीवन पर एक नज़र

लेकिन अब भी कई लोगों को ये पता नहीं चल पा रहा है कि सिंहला राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व में युद्ध के बाद ये देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.

संवैधानिक बदलावों की मदद से राष्ट्रपति ने अपनी स्थिति काफ़ी मज़बूत कर ली है और कई लोगों में वे काफ़ी लोकप्रिय भी हैं. लेकिन कई लोगों का मानना है कि वे अल्पसंख्यकों की दुखती रग पर मरहम नहीं लगा पाए हैं.

सबसे बड़ी तमिल पार्टी के एमए सुमनथिरन का कहना है कि ख़ासकर उत्तर और पूर्व में बसे तमिल अब भी बड़ी त्रासदी से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा, "कई लोगों के बच्चे मारे गए हैं, उनके मां-बाप, भाई बहन सब मारे गए हैं. कई लोगों को ये पता नहीं कि उनके परिवार के लोग जीवित हैं या मारे गए हैं और वे पिछले दो साल से लगातार उनकी तलाश में लगे हैं."

युद्ध अपराध

पिछले महीने जानकारों के एक समूह ने दोनों ही पक्षों पर युद्ध अपराध के आरोप लगाए थे और कहा था कि इन आरोपों के सबूत हैं.

इस समूह को सयुंक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गठित किया था. हालांकि सरकार ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है.

सरकार और उसके समर्थको के लहजे में एक ललकार सी लगती है. हालांकि मानवाधिकार संगठन सरकार के इन दावों को हास्यास्पद बताते हैं. दोनों तरफ़ से अपनी-अपनी बातों और दावों का प्रचार अब भी युद्ध के बाद के श्रीलंका पर अपनी काली छाया फैलाए हुए है.

मई 2009 में सेना ने इस छोटे से द्वीप को एकजुट किया, जो लंबे अरसे से पृथकतावादी आंदोलन से जूझ रहा था. ये फिर से एक देश है लेकिन किस तरह का देश इस पर अब भी सवाल गहराए हुए हैं.

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