यमन में संकट समाप्त होने के आसार

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यमन की सरकार और विपक्ष का कहना है कि बुधवार को होने वाले एक समझौते से देश में व्याप्त राजनीतिक संकट समाप्त हो सकता है.

पिछले महीने ऐसे ही एक समझौते के आखिरी क्षणों में मौजूदा राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने उस पर अपनी असहमति जता दी थी.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस नए समझौते के प्रारूप में अमरीकी और यूरोपीय राजनयिकों के सुझाए गए नए संशोधन भी हैं.

इस नए समझौते के तहत सत्ताधारी जनरल पीपुल्स कांग्रेस पार्टी और विपक्षी गठबंधन कॉमन फ्रंट ने एक राष्ट्रीय एकता सरकार में हिस्सा लेने पर सहमति जताई है.

यमन में विपक्षी अधिकारीयों का कहना है कि इस समझौते के बाद 33 साल तक शासन कर चुके राष्ट्रपति सालेह के सत्ता छोड़ने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

संकट की चेतावनी

विपक्षी दल के अधिकारी याहया अबू उसबुआ ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया, "अमरीकी, यूरोपीय और खाड़ी देशों के प्रयासों के बाद राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों के सुझाए गए समझौते पर हामी भर दी. बुधवार को इस पर हस्ताक्षर हो जाएँगे."

उधर राष्ट्रपति सालेह के सहयोगी अहमद-अल-सूफ़ी ने कहा ,"हाँ, समझौता हो सकता है."

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गौ़रतलब है कि पिछले महीने इसी तरह के एक और समझौते का असफल प्रयास किया गया था.

उस समझौते पर हस्ताक्षर इसलिए नहीं हो सके थे क्योंकि राष्ट्रपति सालेह का कहना था कि वे सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख कि हैसियत से उस पर हस्ताक्षर करेंगे.

जबकि विपक्ष की मांग थी कि अली अब्दुल्लाह सालेह को उस समझौते पर हस्ताक्षर बतौर राष्ट्रपति करने चाहिए.

खाड़ी सहयोग परिषद की मध्यस्थता में हुए उस असफल समझौते में ये भी तय हुआ था कि जल्दी पद छोड़ने के बदले राष्ट्रपति पर कोई मुक़दमा नहीं चलाया जाएगा.

यमन में जनवरी में सरकार विरोधी विद्रोह शुरू होने के बाद से 130 लोग सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार बन चुके हैं.

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