यूक्रेन की सड़क: जान हथेली पर

रोड क्रॉसिंग

जहां एक ओर यूक्रेन वर्ष 2012 में होने वाले यूरोपियन फुटबाल चैपियनशिप की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी ओर यहां लोगों में इसे लेकर उत्साह और डर दोनों है.

यहाँ पर लोगों को डर इस बात को लेकर है कि जब पर्यटक यूक्रेन की जिंदगी के बारे में सच्चाई को जानेगें खा़सकर सड़कों के बारे में तो चकित हो जाएंगे.

यूक्रेन में सड़क दुर्घटना एक ऐसी जंग है जहां जीत की कोई उम्मीद नहीं हैं.

यूरोप में हो रहे सड़क हादसों की सूची में यूक्रेन सबसे ऊपर है और इसमें सबसे बड़ी संख्या पैदल चलने वालों की है. वहाँ कुल सड़क हादसों के शिकार 40 फीसदी पैदल यात्री होते है.

केवल वर्ष 2010 में सड़क हादसों में 4682 लोग मारे गए और 38 हज़ार 823 लोग घायल हो गए थे.

हाल के कुछ सालों से यूक्रेन इस समस्या से जुझने की कोशिश कर रहा है.

बड़े शहरों में इन हादसों को कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ड्राइवरों को पैदल यात्रियों के लिए ट्रैफ़िक लाइट सिग्नल और सड़क पार करने के लिए बने ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर रोकने में सफलता पाई है.

पहले ऐसा नहीं होता था.

कड़े नियम

ड्राइवर इस नई आदत को अपना लें इसके लिए प्रशासन कई साधारण लेकिन प्रभावशाली कदम उठा रही है.

तीन हफ़्तों तक प्रयोग के तौर पर बड़े शहरों में ट्रैफ़िक पुलिस रोड क्रॉसिंग पर खड़ी रही और बिना किसी रियायत उन ड्राइवरों का चलान काटती रही, जो ड्राइवर पैदल यात्रियों को रास्ता नहीं दे रहे थे.

ये चलान या फ़ाइन तो कम ही था लेकिन उसे देना ज़रूरी कर दिया गया और इस मामले पर पुलिस को रिश्वत लेने से भी रोक दिया गया.

इसका नतीजा ये हुआ कि कुछ ही दिनों में ड्राइवरों ने अपनी आदत सुधार ली और अब वे लगातार इस नियम का पालन कर रहे है.

लेकिन हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है.

अब जब पैदल चलने वाले यात्रियों को ये आभास हो गया है कि ड्राइवर क्रॉसिंग पर रूकेगें, तो वह बेफ़िक्र हो गए ज़ेब्रा क्रॉसिंग से ही सड़क पार करना शुरु दिया.

इससे ड्राइवरों को दिक्कतें आने लगी.

अगर वह पैदल चलने वाले लोगों को ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार करते समय टक्कर मारते हैं तो उनको ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

गांव में दूसरी कहानी

इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption एक मां छोटे बच्चों के साथ सड़क पार करते समय कम चौकस होती है

यूक्रेन के ग्रामीण इलाक़ो में दूसरी ही कहानी है.

यहां पर ड्राइवरों पर शहरों जैसे कठोर नियम लागू नहीं किए गए हैं और पैदल चलने वाले लोग मोटर-कारों से सावधान ही रहते हैं.

यूक्रेनी स्वभाव का हिस्सा है कि वो क़िस्मत पर भरोसा करते है. लोग सोचते हैं कि किस्मत उनके साथ है इसलिए कोई अनहोनी नहीं होगी.

इसका फल ये होता है कि यदि किसी यूक्रेनी को ये पता है कि ज़ेब्रा क्रॉसिंग 20 मीटर दूर है इसके बावजूद वह पैदल वहां तक नहीं जाते और कारों की भीड़ के बीच से ही सड़क पार करने की कोशिश करते हैं.

यूक्रेन में ज्यादातर सड़क हादसों की एक बड़ी वज़ह शराब पीकर चलने वाले भी हैं.

ये हादसे शाम को और छुट्टी वाले दिन होते है जब शराब पीने वालों की संख्या एक ख़तरनाक स्तर तक पहुंच जाती है.

अंडरपास

अगर आप ड्राइवरों से पूछें की कौन सबसे ख़तरनाक पैदल यात्री होते है तो वह उनका जवाब होगा, 'शराब पीने वाले लोग'.

उनका कहना है कि एक मां छोटे बच्चों के साथ सड़क पार करते समय कम चौकस होती है.

यूक्रेन के ज्यादातर शहरों में आपको अंडरपास मिल जाएंगें. अंडरपास सड़क पार करने के लिए भूमिगत रास्ता होता है.

अंडरपास सड़क पर चल रही मोटर-कारों से बेहद ही सुरक्षित होता है लेकिन लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते.

अंडरपास का लोग तीन कारणों से इस्तेमाल नहीं करना चाहते.

एक तो लोग अंडरपास में बनी सीढीयों को चढ़ना उतरना नहीं चाहते. इसका एक कारण तो ये भी होता है कि सर्दियों में इन सीढ़ियों में फ़िसलन होती है. रात के समय किसी बदमाश से टकराने का डर रहता है और तीसरा कारण ये होता है कि ज़्यादातर अंडरपास अघोषित सार्वजनिक शौचालय में तब्दील हो गए हैं.

ट्रैफ़िक पुलिस भी ज्यादातर मामलों में पैदल यात्रियों पर ही आरोप लगाती है. लेकिन परिवहन ढाँचे की स्थिति भी एक चिंता का विषय है.

आंखों से ओझल

Image caption अंडरपास कारों से बेहद ही सुरक्षित होता है लेकिन लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं.

कीव शहर में सैकड़ो पैदल यात्रियों के लिए ज़ेब्रा क्रॉसिंग हैं लेकिन ड्राइवर उनको ध्यान में ही नहीं रखते लेकिन ग्रामीण इलाकों में तो ज़ेब्रा क्रॉसिंग है ही नहीं.

यहां ये आमतौर पर देखा जा सकता है कि ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर सफ़ेद पट्टियों का रंग फ़ीका पड़ चुका है, सड़कों को दिशा बताने वाले संकेत अव्यवस्थित हो चुके हैं और ट्रैफ़िक सिग्नल पर लाइट ही नहीं होगी.

शाम के समय सड़क पार करना दोनों पैदल चलने वालों और ड्राइवरों के लिए एक ख़तरनाक अनुभव होता है. यहां ट्रैफ़िक लाइट जली ही नहीं होती.

रात में ड्राइवरों को तो पैदल चलने वाले यात्री 10 से 15 मीटर की दूरी पर पहुँचने के बाद ही नज़र आते हैं.

वैसे किसी को कार के नीचे आने के लिए सड़क पर भी जाने की ज़रूरत नहीं है

कई बार शराब पीकर या तेज़ गाड़ी चलाने वाले बस स्टॉप और सड़क के किनारे फ़ुटपाथ पर भी चढ़ जाते हैं.

समाचार पत्रों और इंटरनेट इन ख़बरों से भरे रहते हैं कि एक कार बस स्टॉप से जा टकराई या शराब के नशे में धुत्त ड्राइवर ने भीड़ में अपनी गाड़ी घुसा दी.

अब ये ख़बरे इतनी आम हो गई हैं कि किसी को न आश्चर्य होता है न दुख.

नियम

कीव में गाड़ी अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाई जा सकती है लेकिन इस नियम का पालन वहीं करते हैं जिनकी गाड़ी की रफ़्तार इससे ज्य़ादा नहीं बढ़ सकती.

लेकिन प्रशासन की ओर से पिछले दो सालों में सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए काम किया गया है.

वर्ष 2010 में सड़क हादसों में 11.3 प्रतिशत से गिरावट आई है.

वहीं इन हादसों से हुई मौतों और घायलों की संख्या में 14.4 प्रतिशत की गिरावट आई है.

यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति ने एक बार कहा था कि देश को ट्रैफ़िक पुलिस की ज़रूरत नहीं है.

लेकिन जिस तरह से हादसों में कमी आई है ये उनके काम का ही नतीजा है.

लेकिन यूरोपियन देशों के साथ चलने में अभी भी यूक्रेन को एक लंबा रास्ता तय करना है और जो अभी चुनौतियों भरा है.

संबंधित समाचार