इसराइल ने ठुकराया ओबामा का सुझाव

बेन्यामिन नेतनयाहू इमेज कॉपीरइट AP
Image caption बेन्यामिन नेतनयाहू ने ओबामा के सुझाव को ठुकरा दिया है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतनयाहू ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस सुझाव को ठुकरा दिया है जिसमें ओबामा ने साफ़ शब्दों में 1967 की सीमा के आधार पर फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का समर्थन किया है.

बेन्यामिन नेतनयाहू ने कहा कि फ़लस्तीनी राष्ट्र की संभावना इसराइल के अस्तित्व की क़ीमत पर नहीं हो सकती.

मध्यपूर्व पर विस्तार पूर्वक दिए गए अपने भाषण में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साफ़ शब्दों में 1967 की सीमा के आधार पर फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का समर्थन किया था. ये किसी भी अमरीकी नेता की ओर से दिया गया सबसे स्पष्ट संदेश है.

अमरीकी विदेश विभाग में दिए गए अपने बहुप्रतीक्षित भाषण में राष्ट्रपति ओबामा ने सुरक्षित और चिन्हित सीमा की महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से सहमति के आधार पर ज़मीनों की अदला-बदली की ज़रुरत होगी.

नेतनयाहू ने ठुकराया सुझाव

इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में नेतनयाहू ने ओबामा से 2004 में किए गए वादों को पूरा करने के लिए कहा है.

नेतनयाहू ने कहा, "अन्य चीज़ों के अलावा हमसे ये वादा किया गया था कि इसराइल को 1967 की सीमा तक पीछे नहीं हटना है क्योंकि ऐसे करने पर जुडीया और समरिया में इसराइली आबादी ख़तरे में आ जाएगी."

लेकिन 'कारनिगी इंडॉमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस'की मध्य-पूर्व मामलों की विशेषज्ञ मिशेल डन के अनुसार ओबामा का भाषण फ़लस्तीन के बजाय इसराइल के हित के अधिक नज़दीक है.

मिशेल डन ने बीबीसी को बताया, "ओबामा ने इसराइल-फ़लस्तीन विवाद के दो केंद्रीय बिंदुओं को सुलझाने पर ज़ोर दिया. इनमें से पहला बिंदु है फ़लस्तीनी राष्ट्र की सीमारेखा और इसराइल की सुरक्षा का इंतज़ाम. और दूसरा है येरुसलम शहर का स्टेटस और फ़लस्तीनी शरणार्थियों के अधिकार. इस नज़रिए का समर्थन फ़लस्तीनियों की बनिस्पत इसराइली अधिक करते हैं."

फ़लस्तीन का हित

उधर फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने बराक ओबामा के भाषण की सराहना की है. अब्बास ने कहा है कि वे वार्ताओं को दोबारा शुरू करने के लिए ओबामा के प्रयासों की तारीफ़ करते हैं.

लेकिन हमास ने कहा है कि इस समय सबसे ज़रुरी चीज़ फलस्तीनी लोगों के हितों के लिए मज़बूत क़दम उठाना है.

हमास के नेता मोहम्मद अवाद ने बीबीसी की अरबी सेवा को बताया,"ओबामा ने 63 साल फलस्तीनी लोगों पर हो रहे अत्याचार पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने ये भी नहीं कहा कि शांति प्रक्रिया रुक गई है. उन्होंने फ़लस्तीनी लोगों के अलावा हर किसी को ख़ुश करने की कोशिश की."

संबंधित समाचार