'भट्टा परसौल की सीबीआई जांच हो'

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राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष यासमीन अबरार ने कहा है कि ग्रेटर नोएडा के पास भट्टा पारसौल गाँव में सात मई को महिलाओं के साथ पुलिस वालों ने बलात्कार किया था और कई लोगों को जलती आग में डाल दिया.

उन्होने प्रधानमंत्री को दी गई अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि गाँव की महिलाओं ने “परोक्ष रूप से कहा है कि उनके साथ बलात्कार हुआ है.”

यासमीन अबरार ने बीबीसी से कहा,“महिलाओं ने रो रो के बयान किया है कि हमारे लोगों को मारा गया है और गठरी में बाँधकर जला दिया गया.”

ये पूछने पर कि क्या इन आरोपों को साबित करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग के पास कोई सबूत हैं, यासमीन अबरार ने कहा, “सबसे बड़ा सबूत है कि वहाँ की महिलाएँ कह रही हैं. हमारे पास सबूत हैं.”

राजनीतिक बवाल

यासमीन अबरार के इस बयान पर उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बवाल हो गया है.

सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि ऐसे बयान देकर आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष काँग्रेस के प्रति अपनी वफ़ादारी साबित करना चाहती हैं.

पार्टी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मौजूदा राष्ट्रीय महिला आयोग को भंग करने और उसमें ऐसे लोगों को नियुक्त करने की माँग की है जो “राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हों.”

उल्लेखनीय है कि काँग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पुलिस गोलीकांड के बाद तड़के भट्टा-पारसौल का दौरा किया और ये बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि वहाँ राख की ढेर के नीचे शव दबे हुए हैं और औरतों के साथ बलात्कार किया गया है.

हालांकि अभी तक स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई है और काँग्रेस भी अब कुछ बचाव की मुद्रा में आ गई है.

आंदोलन जारी

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Image caption भट्टा और पारसौल गाँव के लोग अब भी ख़ौफ़ के साये में जी रहे हैं.

इस बीच सैकड़ों किसानों ने आज सूरजपुर से भट्टा पारसौल तक मौन जुलूस निकालने की कोशिश की पर पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया. ये किसान 1894 के भूमि अधिग्रहण क़ानून को रद्द करके उसकी जगह नया क़ानून बनाए जाने की माँग कर रहे हैं.

राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष यासमीन अबरार ने बीबीसी हिंदी सेवा को दिए एक इंटरव्यू में माँग की है कि भट्टा पारसौल गाँव में हुई पुलिस ज़्यादतियों की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो से करवाई जाए और पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई जाए. प्रस्तुत है बातचीत के अंश:

प्रश्न – आपने जाँच में क्या पाया?

उत्तर – वहाँ सच में महिलाओं पर अत्याचार हुआ है. महिलाओं ने रो रो कर बयान दिया है कि हमारे लोगों को मारा गया है और गठरी में बाँध कर जला दिया गया. उन्होंने कहा है कि हमारे साथ बदतमीज़ी हुई है. हमारे कपड़े फाड़ दिए, ब्लाउज फेंक दिया, एक-एक महिला को पंद्रह-पंद्रह दस-दस पुलिस वालों ने दबोचा है. एकदम सीधे न कह कर परोक्ष रुप से उन्होंने कहा है कि उनके साथ बलात्कार हुआ है. मेरी ये माँग है कि सीबीआई से इसकी जाँच होनी चाहिए और पुलिस एफ़आइआर दर्ज होनी चाहिए.

प्रश्न – क़रीब कितनी औरतों ने ये शिकायत की?

उत्तर – गाँव में जितनी मौजूद थीं वो सब औरतें एकसाथ बोल रही थीं...

प्रश्न- उनमें से बलात्कार की शिकायत कितनों ने की?

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Image caption अपनी ज़मीन बचाने के लिए धरने पर बैठे किसानों को पुलिस ने खदेड़ा.

उत्तर – जो गाँव की औरत है उनके बोलने की सीमा होती है. वो सीधे ये नहीं कह रही थीं कि मेरे साथ बलात्कार हुआ है. कोई कह भी नहीं सकती है. लेकिन जो महिला बोल रही थी उसका सब समर्थन कर रहे थे. पर्दा भी होता है. दूसरे भी सोचेंगे कि ये बहुत गंदी औरत है ... इसके साथ (बलात्कार) हुआ है. मगर सपोर्ट सारी महिलाएँ कर रही थीं और कह रही थीं कि हमारे साथ बलात्कार हुआ है. इसीलिए मैं कह रही हूँ कि इसकी सीबीआइ से जाँच होनी चाहिए उसीके बाद पुख़्ता सबूत हमारे पास आएँगे. लेकिन जो बातें (महिलाओं ने) की हैं उससे तो ये ही ज़ाहिर होता है कि ये हुआ है.

प्रश्न- किसी ने दस्तख़त करके बयान दिया है क्या?

उत्तर- बिलकुल दस्तख़त करके बयान दिए हैं.

प्रश्न- क्या कहा है उन्होंने?

उत्तर- यही कहा है कि बलात्कार की तरफ़ जाता है इशारा.

प्रश्न- इशारा है बलात्कार की तरफ़, लेकिन....

उत्तर – बलात्कार की ही तरफ़ है. हुआ है उनके साथ बलात्कार. पुलिस वालों ने किया है.

प्रश्न – और लोगों को जलाए जाने के आरोपों के बारे में क्या कह रही हैं महिलाएँ?

उत्तर – महिलाएं तो ये ही कह रही हैं कि हमारे घरवालों के शव डाले हैं (जलती आग में.)

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Image caption भट्टा पारसौल की महिलाओं ने पुलिस ज़्यादती की शिकायत की है.

प्रश्न- मैं भी भट्टा गाँव के लोगों से बात करके आया हूँ. वो ये तो कहते हैं कि लोगों को मारा है लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि मरने वालों का नाम, उम्र, ठिकाना क्या है तो वो कहते हैं हमने ऐसा सुना है.

उत्तर – देखिए, तोड़ा मरोड़ा न जाए. वहाँ पर बहुत कुछ हुआ है... उसे स्वीकार करना चाहिए और मीडिया को भी बताना चाहिए. पुलिस को एकदम टाइट करना चाहिए. जो कुछ भी हुआ है... हम जाँच की ही तो बात कर रहे हैं ना? सबूतों को नष्ट नहीं होने देना चाहिए.

प्रश्न – अगर लोगों ने लाशों को जलाते देखा है तो कितने लोग ग़ायब हुए हैं? उनका नाम क्या है? कितने घरों से कितने लोग ग़ायब हुए हैं? इसका कोई सबूत है आपके पास?

उत्तर- सबसे बड़ा सबूत ये है कि वहाँ की महिलाएँ कह रही हैं और हमारे पास सबूत है इसीलिए हम इतनी बात कर रहे हैं.

प्रश्न – कितने लोग ग़ायब हैं? इसका क्या सबूत है?

उत्तर- हमारे पास सबूत है. हमारी ये शुरुआती रिपोर्ट है और फ़ाइनल रिपोर्ट में हम (सबूत) दे देंगे.

प्रश्न- क्या वो औरतें आगे आने को तैयार हैं?

उत्तर- नहीं आएँगी तो हम लेकर आएँगे न? उनको तो अभी ये भी डर है कि हम ही न मार डालें उन्हें.

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