पाकिस्तान की 'आज़ाद' औरतें

पाकिस्तान की कलश घाटी में उत्सवों के दौरान औरतों के लिए लगभग कुछ भी मुमकिन है.

वे किसी के लिए भी अपने प्यार का इज़हार कर सकती हैं, अपनी शादी को तोड़ने का एलान कर सकती हैं और वे किसी के साथ भाग भी सकती हैं.

ये सबकुछ पाकिस्तान में आम औरतों की ज़िदगी से बेहद अलग है. कलश घाटी में औरतों को लेकर काफी खुला दृष्टिकोण है. शायद इसकी एक वजह उनकी ख़ास धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश के कारण है.

बीबीसी संवाददाता नॉशीन अब्बास बताती हैं कि इस घाटी के लोग इस्लाम धर्म नहीं मानते हैं. वे कई सारे देवी–देवताओं को पूजते हैं और उत्सवों का जश्न ख़ूब मनाते हैं और इनके त्यौहार मौसमों से प्रेरित होते हैं.

वो कहती हैं ''हमारे धर्म में आप जिनसे चाहें उनसे शादी कर सकते हैं. मां-बाप अपनी पसंद नही थोपते हैं''. सत्तरह साल की महमूद बेख़ौफ ये बाते कहती हैं.

इस बहुत छोटे और बंद समाज में, घर काफ़ी जुड़े हुए हैं. एक की छत दूसरे के बरामदे में अटकती है और एक सीढ़ी चढ़कर आप एक घर से दूसरे घरों को जा सकते हैं.

ये घाटी पहाड़ो से घिरी है, ख़ूब हरियाली से पटी हुई है.

त्योहारों के भगोड़े

साहिबा एक बीस साल की ख़ुश मिज़ाज लड़की है. उसके दो बच्चे हैं. इन छोटे छोटे घरों की क़तार में एक घर उसका भी है. उसने बताया कि वे कैसे एक त्यौहार के दौरान अपने प्रेमी के साथ भाग गई जो बाद में उसका पति बना.

''मेरे पति से मेरी मुलाक़ात बस यूं ही हो गई थी. हम फिर तीन सालों तक दोस्त बने रहे. त्योहारों के दौरान, लड़कियां अपने प्रेमियों के साथ भाग सकती है. बस ऐसे ही मैं भी अपने प्रेमी के साथ भाग गई और फिर हमने शादी कर ली.''

साहिबा ने बातचीत के दौरान नॉशीन को बताया कि कैसे भागने के बाद वो अपने पति के घर रहने गई.

साहिबा कहती हैं, '' आप जितने दिन चाहें उतने दिन रह सकते हैं. लेकिन फिर दो महीनों के बाद हम दोनों मेरे मां-बाप के घर चले गए फिर शादी हुई.''

ये प्रेम का अनोखा तरीका है और जगह भी ग़ैर पारंपरिक. मर्द और औरतों के बीच काम का साफ़ साफ़ बंटवारा है. औरतें घर देखती हैं और मर्द बाहर का काम, व्यापार आदि. हालंकि खेती का काम दोनों मिल कर करते हैं.

इस घाटी में लिग के प्रति रवैया ‘पवित्रता’ से जुड़ा हुआ है. कुछ रीतियों को निर्वाह केवल पुरूष ही कर सकते हैं. घाटी के मंदिर में मुसलमानों और औरतों को जाने की अनुमति नहीं है.

औरतों को कपड़े अलग धोने होते हैं और नहाना अलग से पड़ता है. मासिक धर्म के दौरान और गर्भावस्था के दौरान, औरतें गांव के बाहर एक अलग घर में रहती हैं. उन दिनों वे खेत पर काम करने ज़रूर जा सकती है लेकिन गांव के अंदर नहीं जा सकतीं हैं.

इस घाटी में रहने वाले यासिर कहते हैं, "औरतों को अपवित्र समझा जाता है लेकिन उनकी इज़्ज़त बेहद है. केवल कुछ ही चीज़े हैं जिनको करने की उनपर मनाही है.''

दबंग औरतें

शादी और तलाक़ मर्दों के मुक़ाबले औरतों के लिए ज़्यादा आसान है. जमरात बाईस साल की हैं. उन्होंने अपनी शादी के एक साल बाद अपने पति को छोड़ दिया और अब किसी और पुरूष के साथ अपने मां-बाप के घर रहती हैं.

लेकिन दूसरी शादी के लिए कुछ वित्तीय समझौते हैं.

जमरात बताती हैं, ''दूसरे पति को शादी के लिए पहले पति से दुगुना पैसा देना होता है. क्योंकि पहले पति के लिए तो पैसा भी गया और बीवी भी."

अगर तलाक़ के बाद लड़की दोबारा शादी नहीं करती है तो पूर्व पति लड़की के पिता से शादी के दौरान दिए पैसे वापस मांग सकता है.

कलश घाटी की औरतें काफी खुल कर बातें करती हैं और आपके आंखों में आंखें डाल कर बातें करती हैं. इस छोटे से गांव में पाकिस्तान के मुख्य शहरों की उथल पुथल से अलग ही दुनिया बसती है.

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