इतिहास के पन्नों से...

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाए तो 25 मई के दिन जहाँ अफ़्रीका के देशों में एकजुटता आई, वहीं अमरीका ने चांद पर जाने की तैयारियों की घोषणा की थी:

1961: अमरीका का चांद पर पहुंचने का अभियान शुरु

Image caption जॉन एफ़ केनेडी अमरीका को जल्द से जल्द चांद पहुंचाना चाहते थे.

अमरीका के राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी ने 25 मई 1961 के दिन अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत के लिए लाखों डॉलर की राशि की घोषणा की थी.

उनका मक़सद था वर्ष 1970 तक अमरीका को चांद पर पहुंचाना. एक भाषण में केनेडी ने अमरीकी अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत के लिए सरकारी बजट में से 170 करोड़ रुपए आवंटित किए जाने की मांग की थी.

उनका कहना था कि इस राशि को अंतरिक्ष यान बनाने और चांद पर जाने वाले अमरीकी एस्ट्रॉनॉट को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

दरअसल इससे पहले रूस के यूरी गैगरिन अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति बने थे. शीतयुद्ध के दौरान सोवियत संघ और अमरीका की दौड़ के समय इस घटना से अमरीका में खलबली मच गई थी. अमरीकी राष्ट्रपति केनेडी ने चांद पर जाने की तैयारियों की घोषणा कर डाली थी.

1963: अफ़्रीकी संघ का गठन हुआ

Image caption अफ्रीकी यूनियन का मुख्यालय आदिस अबाबा में स्थित है.

अफ़्रीकी इतिहास में पहली बार 25 मई 1963 को 32 अफ़्रीकी देशों ने एक संगठन बनाया जिसका मक़सद था अफ़्रीकी देशों को एकजुट करना.

इथियोपिया में हुए एक अफ़्रीकी सम्मेलन में तय हुआ कि अफ़्रीका के कुछ भागों में चल रहे विदेशी शासन के ख़िलाफ़ सभी देश एकजुट हो कर अपनी आवाज़ उठाएंगे.

साथ ही ये भी तय किया गया कि अफ़्रीकी स्वतंत्रता सेनानियों को संगठन धनराशि, हथियार और प्रशिक्षण संबंधी समर्थन देगी ताकि वे बाहरी देशों के शासन को समाप्त करने में कामयाब हो पाएं.

इन अफ़्रीकी देशों ने दक्षिण अफ़्रीका पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी और वहाँ रंगभेद की नीति के चलते दक्षिण अफ़्रीका से कूटनीतिक रिश्ते भी तोड़ देने की बात कही थी.

अमरीका में अफ़्रीकी नागरिकों के साथ हो रहे भेद-भाव के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठने की बात कही गई थी.

इस संगठन के संविधान में लिखा गया कि सभी अध्यक्ष सदस्य देशों के नागरिकों की ज़िंदगी में सुधार लाएंगे और उनकी संप्रभुता के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे.

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