यमन में तेज़ हुआ संघर्ष

Image caption सालेह से सत्ता छोड़ने की अपील

यमन में सरकारी सेना और देश के सबसे ताक़तवर कबायली समूह के बीच जारी संघर्ष तेज़ होता जा रहा है.

राजधानी सना में बीती रात दोनों पक्षों के बीच हुए संघर्ष में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के पद छोड़ने के क़रार पर दस्तख़त करने से इनकार करने के एक दिन बाद सोमवार को शुरू हुई हिंसा में अब तक 80 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

राष्ट्रपति अब्दुल्ला साहेल ने अब कबायली नेता सादिक़ अल अहमर और उनके भाइयों की गिरफ़्तारी के आदेश दे दिए हैं.

अमरीकी चेतावनी

इससे पहले अमरीका ने यमन में अपने सभी ग़ैर-ज़रूरी राजनयिकों और अमरीकी नागरिकों से देश छोड़ने का आदेश दे दिया है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को यमन की यात्रा करने से भी मना कर दिया है.

विदेश मंत्रालय ने अपनी चेतावनी में कहा, ''यमन में चरमपंथी गतिविधियों और नागरिक अशांति को देखते हुए सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है. पूरे देश में अशांति का माहौल है और बड़े शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं.''

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने भी अपने नागरिकों को यमन की यात्रा न करने की सलाह दी है. साथ उसने यमन में रह रहे ब्रितानी नागरिकों को भी तुरंत देश छोड़ने को कहा है.

नागरिक युद्ध

इस बीच सरकार के ख़िलाफ़ कई दिनों से संघर्ष कर रहे ताक़तवर कबायली समूह हाशीद ने राजधानी सना की कई सार्वजनिक इमारतों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है.

राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला साहेल का विरोध कर रहे कबायली लड़ाकों और सरकारी सेना के बीच हुए संघर्ष के बाद सना के हवाईअड्डे को बुधवार को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया.

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Image caption सड़कों पर सालेह की सेना

कबायली लड़ाकों और सरकारी सेना के बीच लड़ाई की शुरुआत सोमवार को उस समय हुई जब राष्ट्रपति सालेह की वफ़ादार सेना ने हाशिद नेता शेख़ सादिक़ अल अहमर के कंपाउंड की घेरेबंदी कर दी.

चिकित्सा सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि अहमर समर्थक महिलाओं, बच्चों और पड़ोसियों समेत 54 लोग दोनों पक्षों की लड़ाई में मारे गए हैं जबकि सरकारी सेना की तरफ़ से 18 लोग मारे गए हैं.

सना में मौजूद सूत्रों ने बीबीसी अरबी सेवा को बताया है कि हिंसा में 250 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

इरादे पर अटल सालेह

बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि राष्ट्रपति सालेह को सत्ता हस्तांतरण की दिशा में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी कहा है कि वो यमन में जारी हिंसा से बहुत परेशान हैं और उन्होंने सभी पक्षों से समस्या का शांतिपूर्ण हल निकालने की अपील की है.

इस बीच राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने अपने प्रवक्ता अहमद अल सौफ़ी के ज़रिए कहा है कि,''मैं सत्ता नहीं छोड़ूंगा और यमन छोड़कर भी नहीं जाऊंगा.''

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Image caption राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह

सालेह ने कहा है कि वो सत्ता हस्तांतरण के क़रार पर अभी भी दस्तख़त करने को तैयार हैं बशर्ते ये राष्ट्रीय संवाद और स्पष्ट प्रक्रिया के मुताबिक़ हो.

अली अब्दुल्ला साहेल पिछले 33 साल से यमन की सत्ता पर काबिज हैं और खाड़ी सहयोग परिषद द्वारा तैयार किए गए हस्तांतरण क़रार पर दस्तख़त करने से उन्होंने इनकार कर दिया है.

इस क़रार में उनसे एक महीने के भीतर सत्ता छोड़ने और एक राष्ट्रीय सरकार को सत्ता हस्तांतरित करने को कहा गया था.

क़रार में राष्ट्रपति सालेह मुक़दमे से भी छूट दी गई थी.

पहले राष्ट्रपति सालेह ने कहा था कि वो केवल विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में ही क़रार पर दस्तख़त करेंगे.

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