'आईएसआई से मिली थी जासूसी ट्रेनिंग'

हेडली से शिकागो की अदालत में पूछताछ
Image caption मुंबई मामले में हेडली से शिकागो की अदालत में पूछताछ हो रही है.

शिकागो में चल रहे मुंबई हमलों से जुड़े मुकदमे के दौरान प्रमुख अभियुक्त डेविड कोलमैन हेडली ने कहा है कि उन्हें पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से जासूसी की ट्रेनिंग मिली थी.

हेडली ने कोर्ट में पूछताछ के दौरान कहा, ''आईएसआई ने मुझे ट्रेनिंग दी थी.''

हेडली के अनुसार आईएसआई के मेजर इकबाल उनसे बातचीत करते थे और मेजर इकबाल का कहना था कि लश्कर की 'ट्रेनिंग अच्छी नहीं' है इसलिए वो हेडली को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

हेडली का कहना था कि उन्हें लाहौर के एक घर में ट्रेनिंग दी जाती थी. हालांकि बार बार सवाल पूछे जाने के बावजूद हेडली मेजर इकबाल का पूरा नाम नहीं बता पाए.

इक़बालिया बयान

शिकागो की अदालत में हेडली से पूछताछ चल रही है क्योंकि हेडली ने इस मामले में इक़बालिया बयान देकर आरोप स्वीकार किए हैं और अपने साथी तहव्वुर राणा के ख़िलाफ बयान भी दिया है. वो राणा के ख़िलाफ़ इस आधार पर बयान देने को राज़ी हुए है कि उनको इसके बदले फांसी न हो.

कोर्ट ने पूर्व में दिए गए हेडली के बयान को सार्वजनिक कर दिया है.

हेडली के बयानों के अनुसार उन्होंने कभी भी मेजर इकबाल को मिलिट्री यूनिफॉर्म में नहीं देखा है और न ही वो मेजर इकबाल का पूरा नाम जानते हैं. हेडली का कहना है कि उन्हें किसी ने मेजर इकबाल से मिलाया था और उन्हें पूरा यकीन है कि मेजर इकबाल आईएसआई के ही अधिकारी थे.

हेडली ने बताया कि मेजर इकबाल उनसे बार बार मिलिट्री जीपों में आते थे और उनके साथ मिलिट्री के अधिकारी भी होते थे जो उनके मातहत काम करते थे.

हेडली के इन बयानों से भारत के उन आरोपों को बल मिला है जिसमें भारत बार बार मुंबई हमलों के लिए आईएसआई की मिलीभगत की बात करता रहा है.

हेडली से कोर्ट में पूछताछ के दौरान ये बात भी सामने आई है कि उन्होंने डेनमार्क के कोपेहेगन शहर और एक अख़बार जिलेन पोस्टन की इमारतों को भी निशाना बनाने के लिए इनका दौरा किया था.

हेडली ने इन इमारतों का पूरा वीडियो बनाया था लेकिन इन पर हमला करने की योजना को अमली जामान नहीं पहनाया गया.

पूछताछ में हेडली ने लगभग वही बातें दोहराई जो वो पहले कह चुके हैं.

ग़लतियों का ज़िक्र
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Image caption हमलावरों संभवत इसी नाव से मुंबई के तट पर पहुंचे थे औऱ इसी में उनका सेटेलाइट फोन छूटा था.

अदालत ने जो दस्तावेज सार्वजनिक किए है उसके अनुसार मुंबई में 26 नवंबर को हुए हमलों के लिए लश्कर ए तैबा ने फ़ूलप्रूफ़ प्लान बनाया था लेकिन उन्होंने कई ऐसी ग़लतियां की जिससे भारतीय गुप्तचर एजेंसियों के लिए कई महत्वपूर्ण सुराग बचे रहे.

दस्तावेजों के अनुसार ये ग़लतियां लश्कर के मास्टरमाइंड साजिद मीर ने डेविड कोलमन हेडली के साथ बातचीत में मानी थीं.

हेडली मुंबई हमलों के मामले में अभियुक्त है और उन्होंने आरोपों को स्वीकार किया है.

दस्तावेज़ों के अनुसार साजिद ने हेडली से कहा कि मुंबई पर सिर्फ़ दस लोगों ने हमला किया था. साजिद ने हेडली से बताया कि लश्कर के उनके साथी अबू कहाफा ने हमलावरों को विस्फोटकों की ट्रेनिंग थी और उन्होंने हमलावरों को टैक्सियों में रखने की सलाह दी थी ताकि भारतीय अधिकारियों में भ्रम की स्थिति बने.

दस्तावेज़ों के अनुसार साजिद ने बाद में हेडली से एक मुलाक़ात के दौरान बताया कि कुछ हमलावरों ने निर्देश नहीं माने और वो उस नाव को डुबाने में विफल रहे जिसके ज़रिए वो मुंबई के समुद्री तट पर पहुंचे थे.

इतना ही नहीं हमलावरों का एक सैटेलाइट फ़ोन भी नाव में छूट गया था और साजिद ने इस ग़लती का भी ज़िक्र हेडली से किया.

दस्तावेज़ों में बताया गया है कि भारतीय अधिकारी इस नाव को खोज निकालने में न केवल सफल रहे बल्कि सैटेलाइट फ़ोन भी खोज लिया और उसे एफ़बीआई को फ़ोरेंसिक जांच के लिए दिया.

इस फ़ोन से वासी नामक एक व्यक्ति को 24 नवंबर 2008 और 25 नवंबर 2008 को कॉल किया गया था.

मुंबई हमलों से जुड़े कई दस्तावेज़ हैं जिनमें से कुछ को बुधवार को कोर्ट ने लोगों के लिए जारी कर दिया है.

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