आईएमएफ़ में उम्मीदवार उतारने के बारे में ब्रिक्स देशों में मंत्रणा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मुख्यालय इमेज कॉपीरइट AP

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यकारी निदेशक अरविंद विरमानी ने बीबीसी को दिए गए एक ई-मेल इंटरव्यू में बताया है कि ब्रिक्स देश आईएमएफ़ के प्रबंध निदेशक पद के लिए उम्मीदवार खड़ा करने के बारे में विचार विमर्ष कर रहे हैं. प्रस्तुत हैं बीबीसी के राजेश जोशी को दिए साक्षात्कार के मुख्य अंश:

आप अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक पद के लिए किसी यूरोपीय व्यक्ति की नियुक्ति के ख़िलाफ़ क्यों हैं ?

हमने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक पद के लिए उम्मीदवार खड़े करने के किसी व्यक्ति, देश या संगठन के अधिकार पर सवाल नहीं उठाए हैं. जो भी इस तरह की बात कर रहा है वह ग़लत सूचना दे रहा है. हम यह कहना चाह रहे हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को विश्व स्तर की विश्वसनीय और जायज़ मौद्रिक संस्था बनना है तो तो उसके प्रबंध निदेशक का चुनाव एक ऐसी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए जिसमें स्वतंत्र विचार रखने वाले निष्पक्ष योग्य व्यक्ति को तरजीह दी जाए.

इस तरह की प्रक्रिया पद पाने वाले के साथ-साथ असफल रहे व्यक्ति के लिए भी पारदर्शी होनी चाहिए. हमने यह भी ज़ोर दिया है कि आईएमएफ़ की संचालन और कोटा व्यवस्था में बदलाव के लिए नए प्रबंध निदेशक को निष्पक्ष और खुले मन का होना चाहिए और ताकि वह वैश्विक आर्थिक वास्तविक्ताओं को परिलक्षित कर सके. दस जून को नामाँकन की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद हम सभी उम्मीदवारों की ख़ूबियों पर विचार करेंगे जिसमें क्रिस्तीन लगार्द भी शामिल हैं.

क्या आप विकासशील देशों की ओर से भी उम्मीदवार खड़ा करने के बारे में सोच रहे हैं ?

ब्रिक्स देशों के बीच इस बारे में चर्चा हो रही है और जल्द ही जी पूरे 24 देश भी इस बारे में विचार करेंगे.

ऐसे मुद्दे पर जिसका ब्रिक्स से सीधा लेना देना नहीं है,ब्रिक्स के निदेशकों के साथ आने को आप कितना महत्वपूर्ण मानते हैं ?

क्या आप यह कहना चाह रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा जैसी वैश्विक संस्था का नेतृत्व यूरोपीय संघ,जी 8 या ओईसीडी जैसी संस्थाओं के हाथ में छोड़ देना चाहिए ?

क्या ब्रिक्स या जी 24 का इससे कोई वास्ता नहीं होना चाहिए ?

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के पुनर्गठन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. क्या आप अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सार्थक पुनर्गठन के लिए विकासशील देशों से भी सहयोग लेने का इरादा रखते हैं ?

डेढ़ साल से जब से मैं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यकारी बोर्ड से जुड़ा हुआ हूँ, इसके संचालन में सुधार इसके मुख्य एजेंडा में है.

इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मुद्दा यह उठता है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में कुछ क्षेत्रों को आनुपातिक रूप से ज़्यादा प्रतिनिधित्व मिलता रहेगा,तब तक क्या किसी सार्थक सुधार की उम्मीद की जा सकती है ?

यह ऐसे मुद्दे हैं जिन्हे हम अपने ब्रिक्स और ईएमडीसी साथियों और उन विकसित देशों के साथ बोर्ड में उठाते रहेंगे, जो यह मानते हैं कि इसके पारदर्शी और जायज़ संचालन से उनके अपने हित जुड़े हुए हैं.

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