जर्मनी 2022 तक सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बंद करेगा

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Image caption एंगेला मर्केल ने पहले परमाणु ऊर्जा नेटवर्क की अवधि बढ़ा दी थी

जर्मनी की गठबंधन सरकार ने फ़ैसला किया है कि वह देश के सभी परमाणु ऊर्जा केंद्र वर्ष 2022 तक बंद कर देगी.

ये फ़ैसला रविवार को देर रात तक चांस्लर एंगेला मर्केल की सरकार के वरिष्ठ सदस्यों की बैठक के बाद लिया गया है. पर्यावरण मंत्री नॉर्बर्ट रॉटजेन ने सत्ताधारी गठबंधन की बैठक के ये घोषणा की है.

जापान में भूकंप और सुनामी के बाद फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से रोडियोधर्मी लीक के बाद जर्मनी में मार्च में ही सात पुराने परमाणु संयंत्रों को बंद कर दिया गया था. अब वे स्थायी तौर पर बंद रहेंगे.

अवसरवाद का आरोप

बीबीसी संवाददाता शॉन फ़ैनिंग के अनुसार पिछले ही साल चांस्लर एंगेला मर्कल ने जर्मनी के परमाणु ऊर्जा नेटवर्क की अवधि बढ़ा दी थी. चांस्लर मर्कल के नीति में अचानक बदलाव के बाद उन पर राजनीतिक अवसरवाद के आरोप लगे हैं. इसी तथाकथित अवसरवाद को हाल के क्षेत्रीय चुनावों में सत्ता पक्ष को हुए नुक़सान का दोषी ठहराया गया है."

लेकिन फ़ुकुशिमा के बाद सब कुछ बदल गया है. जर्मनी के 17 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में से आख़िरी वर्ष 2022 में बंद हो जाएगा.

मार्च में सात परमाणु संयंत्रों के बाद हो जाने के बाद, छह अन्य 2021 तक बंद हो जाएँगे और बाक़ी 2022 तक बंद हो जाएँगे.

महत्वपूर्ण है कि फ़ुकुशिमा हादसे के बाद जर्मनी में परमाणु संयंत्र बंद करने के पक्ष में बड़े-बड़े प्रदर्शन हुए थे. जर्मनी में पर्यावरण को बचाने के पक्ष में बहुत बड़ा अभियान दशकों तक चला है.

अब ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि देश की ऊर्जा ज़रूरतों को अक्षय ऊर्जा - पवन और सौर ऊर्जा से पूरा किया जाएगा.

लेकिन जर्मनी की कुल ज़रूरत में से 25 फ़ीसदी ऊर्जा परमाणु संयंत्रों से आती है, उद्योग जगत ने ऊर्जा कि किल्लत के बारे में चिंताएँ जताई हैं.

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