इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों में अगर झांकें तो दो जून को ही महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का राज्याभिषेक हुआ था और इसी दिन अमरीका का पहला अंतरिक्ष यान चाँद पर उतरा था.

1953 : महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का राज्याभिषेक

Image caption महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के राज्याभिषेक के 50 साल 2002 में पूरे हुए.

वर्ष 1953 में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय लंदन के वेस्टमिन्स्टर एबे में हुए एक समारोह में दो जून को ही ब्रिटेन की महारानी घोषित की गईं थीं.

देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं सहित 8000 मेहमानों के सामने उन्होंने शपथ ली. इस शपथ के साथ ही महारानी अपने लोगों की सेवा करने और ईश्वर के कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य हैं.

कैंटबरी के आर्चबिशप ज्यॉफ्री फ़िशर ने इस अवसर पर रानी को राजसत्ता के चार चिन्ह- राजदंड, दया की छड़ी, एक नीलम और माणिक की अंगूठी और एक गोल राजचिन्ह सौंपे और उनके सर पर सेंट एडवर्ड का मुकुट रखा.

महज़ 25 बरस की राजकुमारी ने अपने पिता जॉर्ज षष्टम के मृत्यु के बाद उनकी जगह ली थी.

उनके पिता ने 16 साल तक सिंहासन पर रहने के बाद छह फ़रवरी को नींद में अपनी अंतिम सांस ली थी. यूँ तो राजकुमारी को उसी समय महारानी और धर्म का रक्षक घोषित कर दिया गया था समारोह की तैयारियों के चलते औपचारिक उत्सव में इतने दिन लग गए.

1966 : पहला अमरीकी यान चाँद पर उतरा

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Image caption चाँद की धरती पर उतरने वाला पहला यान सोवियत संघ का था

दो जून को ही अमरीका का पहला अंतरिक्ष यान चाँद की ज़मीन पर सफलतापूर्वक उतरा था. सर्वेयर 1 नाम का ये यान आशंकाओं के विपरीत बहुत ही सफल ढंग से चाँद पर उतरा.

वैज्ञानिकों का आकलन था की सफलता कम से कम चार प्रयासों के बाद आएगी.

सोवियत संघ चार महीने पहले ही ये सफलता हासिल कर चुका था.

चाँद की धरती पर उतरने के महज़ चार घंटों के भीतर ही सर्वेयर-1 ने तस्वीरें भेजनी शुरू कर दीं.

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस मौके पर कहा कि सोवियत संघ के विपरीत अमरीका चाँद से आई तस्वीरों को जल्द से जल्द जारी कर देगा. सोवियत संघ ने तस्वीरों को जारी करने में कुछ समय लगाया था.

वैज्ञानिकों का मानना था कि इस सफल प्रयास से अमरीका का चाँद पर मानव को भेजना आसान हो गया था.

1979 : पोप जॉन पॉल द्वितीय की पहली घर यात्रा

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Image caption पोप जॉन पॉल द्वितीय आज ही के दिन पोप बन कर पहली बार अपनी मातृभूमि लौटे थे

वर्ष 1979 में दो जून को ही पोप जॉन पॉल द्वितीय पोप की पदवी सँभालने के बाद पहली बार अपनी मातृभूमि पोलैंड लौटे थे. ये किसी भी सर्वोच्च रोमन कैथोलिक धर्मगुरु की इस कम्युनिस्ट देश में पहली यात्रा थी.

पोप हवाई ज़हाज़ से उतरे और उतरते ही उन्होंने घुटनों के बल बैठ कर अपनी मातृभूमि को चूमा.

पोप को हवाई अड्डे से एक खुली गाड़ी में उनके ठहरने के स्थान ले जाया गया. रास्ते भर सड़कों के दोनों तरफ खड़े क़रीब 20 लाख लोगों ने उनका अभिवादन किया.

बाद में एक औपचारिक सम्मलेन में उन्होंने कहा " मैं अपने देशवासियों के बीच में एकता की कामना करता हूँ और उम्मीद करता हूँ की मेरी मातृभूमि में चर्च और राज्यसत्ता के आपसी संबंध सुधरेंगे."

पूर्वी यूरोप में वामपंथ के पतन के लिए पोप की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है.

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