युद्ध अपराध में लिप्त सेना और विद्रोही:यूएन

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Image caption नैटो के हमलों में लीबिया की सेना को काफी नुकसान पहुंचा है

संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने लीबिया में सरकारी और विद्रोही फौजों पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें कई स्थानों पर हत्या और प्रताड़ना के सबूत मिले हैं और ये जिस तरह से हुए हैं वो इशारा करते हैं कि इनके पीछे लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी का हाथ है.

संयुक्त राष्ट्र मिशन ने ये भी कहा है कि विद्रोही गुट ने भी अधिकारों का हनन किया जिन्हें युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन इनकी संख्या कम है.

इस बीच नैटो ने लीबिया में अपना मिशन नब्बे दिनों के लिए बढ़ा दिया है.

संयुक्त राष्ट्र जांचकर्ताओं की रिपोर्ट बुधवार को जेनेवा में जारी की गई. तीन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मिलकर ये रिपोर्ट बनाई है.

ये तीनो विशेषज्ञ लीबिया गए थे और इन्होंने दोनों पक्षों के कब्जे़ वाले इलाक़ों में लोगों से बातचीत की. इसके अलावा इन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों, हिरासत में रखे गए लोगों के परिवारजनों और मानवाधिकार गुटों से भी मुलाक़ात की है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट सरकारी और विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में 350 लोगों के साथ बातचीत पर आधारित है. इस रिपोर्ट में शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों से भी बात की गई है.

आयोग ने अपने बयान में कहा, ‘‘आयोग को लीबिया में अपराधों की जांच करनी थी और हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सरकारी सेनाओं ने मानवता के ख़िलाफ़ और युद्धअपराध किए हैं.’’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हमें इस बारे में कम रिपोर्टें और सबूत मिले जिससे कहा जा सके कि विद्रोही गुटों ने भी युद्ध अपराध किए लेकिन कुछ बातें ऐसी दिखी जो युद्ध अपराध की श्रेणी में आती हैं.’’

इस रिपोर्ट में लीबियाई विद्रोहियों द्वारा प्रवासी मज़ूदरों को कथित रुप से प्रताड़ित किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई है.

इस रिपोर्ट पर सोमवार को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बहस होगी.

इससे पहले ब्रसेल्स में नैटो के 28 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नैटो का मिशन 90 दिन बढ़ाने का फ़ैसला किया.

लीबिया में नैटो के मिशन को संयुक्त राष्ट्र का आदेश प्राप्त है और इसकी अगुआई पहले फ्रांस, ब्रिटेन और अमरीका ने की थी जिसके बाद 31 मार्च से इसकी कमान नैटो के हाथ में है.

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