दुर्रानी लगाते थे माँग पर छक्का

सलीम दुर्रानी को सम्मानित करते चिरायु अमीन

सलीम दुर्रानी ने वह गेंद 40 साल पहले फेंकी थी लेकिन भारत के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर को वह गेंद अभी भी याद है.

1971 में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट के चौथे दिन गेंद स्पिन तो ले रही थी लेकिन रॉय फ़्रेडरिक्स ने आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए भारत की पहली पारी की 138 रनों की लीड को क़रीब क़रीब ख़त्म कर दिया था.

तभी 80 के स्कार पर फ़्रे़डरिक्स आउट हुए और वाडेकर को लगा कि भारत के लिए मौक़ा हो सकता है और उन्होंने रफ़ का फ़ायदा उठाने के लिए दुर्रानी को लाने का फ़ैसला किया.

उस समय दुर्रानी 37 साल के थे.

वाडेकर याद करते हैं, "दुर्रानी ने वह गेद रफ़ में डाली. सोबर्स ने उसे खेलने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया. गेंद उस तरह से स्पिन हुई जैसे कोबरा डसने के लिए अपना फ़न मारता है. उसने सोबर्स के बढ़े बैट को बीट किया और उनकी लेग बेल ले उड़ी."

सुनील गावस्कर अपनी आत्मकथा ’ सनी डेज़’ में लिखते हैं, “सोबर्स को आउट करने के बाद जिस तरह से चचा दुर्रानी उछले थे और कई बार उछलते चले गए थे वह दृश्य देखने लायक़ था जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.”

'ड्रीम डिलेवरी'

सलीम दुर्रानी

दुर्रानी क्रिकेट खेलने के साथ साथ एक फ़िल्म में भी काम कर चुके हैं

वाडेकर के शब्दों में वह एक 'ड्रीम डिलेवरी' थी. अगर उस ज़माने में टेलीविज़न होता तो वह गेंद बार बार दिखाई जाती.

वह गेंद शेन वॉर्न की उस गेंद से किसी माने में कम नहीं थी जिसने माइक गेटिंग को बोल्ड किया था और जिसे ‘शताब्दी की गेंद’ की संज्ञा दी गई थी.

इसी पारी में लॉयड को आउट कर दुर्रानी ने भारत की वेस्ट इंडीज़ पर पहली जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

लेकिन सलीम दुर्रानी को याद किया जाता है उनके छक्कों की वजह से. दर्शकों की माँग पर मैदान के किसी भी कोने में छक्का मारने के लिए वह मशहूर थे.

1934 में काबुल में जन्मे दुर्रानी ने भारत के लिए 29 टेस्ट खेले और 25 रन प्रति पारी की औसत से 1202 रन बनाए लेकिन उनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व को औसत से नहीं नापा जा सकता.

वह भारतीय क्रिकेट के शायद पहले स्टाइल आइकन थे.

कॉलर खड़ा कर मैदान में उतरने की उनकी अदा क्रिकेट प्रेमियों के इतनी पसंद थी कि एक बार जब उनको टीम में नहीं चुना गया तो लोग बैनर लेकर आ गए “नो दुर्रानी नो टेस्ट.”

दुर्रानी की क्रिकेट उपलब्धियों पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें सीके नायडू लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया है.

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